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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे आम लोगों के लिए ईंधन की लागत बढ़ना अपरिहार्य हो गया है। इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें घरेलू बजट पर दबाव डालेंगी
यह एक वैश्विक मुद्दा है जो नीति निर्माताओं के नियंत्रण से बाहर है। शर्मा ने कहा कि इससे घरेलू बजट पर असर पड़ेगा और परिवारों को कुछ कठिनाइयां होंगी। भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई को भी बढ़ा सकती हैं। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है।
भारत तेल मूल्य झटकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता कम करने पर काम कर रहा है। देश नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत का एक तिहाई कुल ऊर्जा उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से होता है। यह दुनिया में सबसे स्वस्थ ऊर्जा उत्पादन अनुपातों में से एक है। हालांकि, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में समय लगेगा।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/west-asia-crisis-crude-oil-crosses-usd-100-fuel-prices-to-strain-household-budgets-2026-06-06