त्योहारों से पहले खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत हैं। सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और आयात घटने से पाम, सोयाबीन व सरसों तेल के दाम 8 से 12 फीसदी तक बढ़ सकते हैं।
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देश में त्योहारों का सीजन दस्तक दे रहा है और इसी बीच खाद्य तेलों की मांग आसमान छूने लगी है। इससे एक बार फिर रसोई का बजट बिगड़ने के आसार बन गए हैं। काला सागर क्षेत्र में जंग और रूस-यूक्रेन युद्ध गहराने के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत आने वाले जहाजों में 60 दिनों तक की देरी हो रही है, जिससे देश में खाद्य तेल महंगा होना तय माना जा रहा है।
दुनिया के कुल सूरजमुखी तेल निर्यात में रूस और यूक्रेन की हिस्सेदारी 63 फीसदी है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों में रूस के बंदरगाहों को निशाना बनाने से काला सागर का समुद्री मार्ग जहाजों के लिए असुरक्षित हो गया है। इसके चलते आयातकों के दर्जनों जहाज फंस गए हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सूरजमुखी तेल इसी क्षेत्र से मंगाता है।
इस महीने सूरजमुखी तेल कीमत सूचकांक 6 फीसदी तक चढ़ गया। तेल महंगा होने से अब मांग पाम और सोयाबीन तेल की तरफ जा रही है, जिससे उनके भाव भी तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अल-नीनो के प्रभाव और इंडोनेशिया-मलेशिया के बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ाए जाने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों का स्टॉक सीमित है। ऐसे में काला सागर संकट से सरसों तेल, सोयाबीन तेल, पाम तेल और सूरजमुखी तेल, सभी की खुदरा कीमतें आगामी महीनों में 8 से 12 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/edible-oil-prices-may-rise-before-festivals-as-sunflower-oil-supply-crisis-deepens-2026-07-31