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देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। संसद की एक स्थायी समिति ने कहा है कि उच्च शिक्षा के लिए मौजूदा बजट आवंटन अपेक्षा से कम है और इसे बढ़ाने की जरूरत है। समिति ने केंद्र सरकार से शिक्षा पर कुल खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के छह प्रतिशत तक ले जाने के लिए गंभीर प्रयास करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि मौजूदा खर्च एनईपी-2020 के निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे है।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2025-26 के लिए उच्च शिक्षा विभाग के बजट अनुमान में हुई वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में कम है। समिति का कहना है कि देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए बजट में कम से कम 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उच्च शिक्षा क्षेत्र में वास्तविक खर्च और संसाधनों पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं, लेकिन मौजूदा आवंटन इस जरूरत के अनुरूप नहीं दिखाई देता।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का हवाला देते हुए कहा कि नीति स्पष्ट रूप से केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश को बढ़ाकर जीडीपी के 6 प्रतिशत तक पहुंचाने की बात करती है। हालांकि समिति ने चिंता जताई कि 2021-22 में भारत का कुल शिक्षा व्यय जीडीपी का केवल 4.12 प्रतिशत था। यह आंकड़ा एनईपी के लक्ष्य से काफी कम है। समिति का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक स्तर की शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी है तो शिक्षा पर निवेश बढ़ाना अनिवार्य होगा।

भूटान ने शिक्षा पर GDP का 7.47% खर्च किया।

भारत ने शिक्षा पर केवल 4.12% GDP खर्च की।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/par-panel-moots-higher-education-spending-says-neps-pc-gdp-target-unmet-2026-06-17