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अदालत ने कहा कि कथित लेन-देन वर्ष 2004 में हुआ था, जबकि प्राथमिकी (एफआईआर) सात अप्रैल 2026 को दर्ज की गई।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि कल्पना खरात किसी भी बातचीत, बैठक या जमीन के सौदे में शामिल नहीं थीं।
उन्होंने विवादित कृषि भूमि का कभी दौरा नहीं किया, न ही शिकायतकर्ता या उसके भाइयों को कोई आश्वासन दिया, धमकी दी या किसी तरह का झूठा वादा किया।
अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह से एक दीवानी लेन-देन का मामला है, जिसे आपराधिक मामला बना दिया गया है।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/nashik-court-grants-pre-arrest-bail-to-ashok-kharat-s-wife-in-black-magic-and-land-deal-case-2026-06-23