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भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट से तेल आपूर्ति में संभावित बाधा भारत के लिए महंगाई आधारित मंदी का जोखिम बढ़ा सकती है। नुवामा नामक वित्तीय सेवा फर्म ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद विश्लेषण रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। यह तब हुआ है जब देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026 को उम्मीद से बेहतर वृद्धि के साथ समाप्त किया।

नुवामा ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि अनुमान को घटाकर 6-6.5 फीसदी कर दिया है। हालांकि, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद 11-12 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। यह संशोधन ईरान संकट से जुड़ी ऊंची तेल कीमतों के प्रभाव के कारण हुआ है। ऊंची इनपुट लागत से परिवारों और कारोबारों पर दबाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कुछ घरेलू कारकों का भी उल्लेख किया गया है जो नकारात्मक जोखिमों को सीमित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक का कुशल तरलता प्रबंधन इसमें सहायक होगा। रुपये का अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन और स्वस्थ ऋण वृद्धि भी गिरावट को कम करने में मदद कर सकती है। वित्त वर्ष 2026 में निवेश में तेजी आई थी, जो मार्च तिमाही में 10.8 फीसदी तक पहुंच गया।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/iran-crisis-weak-monsoon-nuvama-warns-of-stagflation-risk-for-india-2026-06-06