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भारत में सड़क किनारे मिलने वाले गरमा-गरम वड़ापाव या पकौड़ों को अखबार में लपेटकर देना एक आम बात है। लेकिन यह 'जुगाड़' अब महंगा पड़ सकता है। हाल ही में एक मशहूर वड़ापाव विक्रेता के खिलाफ हुई बड़ी कार्रवाई ने फूड पैकेजिंग के खतरनाक सच को सामने ला दिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने साफ कर दिया है कि अखबार में खाना लपेटना केवल असुरक्षित ही नहीं, बल्कि गैरकानूनी भी है। आइए, इस पूरे विषय को आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि यह कदम छोटे कारोबारियों और आपकी सेहत के लिए क्या मायने रखता है।

हाल ही में यह देखा गया कि एक मशहूर वड़ापाव विक्रेता ग्राहकों को अखबार में खाना पैक करके और परोस कर दे रहा था। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए, एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र और बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है। पूरे शहर और क्षेत्र में ऐसी अन्य घटनाओं की संभावना को देखते हुए, एफएसएसएआई ने सभी खाद्य विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे खाना पैक करने या परोसने के लिए अखबार का इस्तेमाल तुरंत बंद करें।

जवाब: एफएसएसएआई के अनुसार, अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में कई हानिकारक रंग, पिगमेंट, बाइंडर और रसायन होते हैं। इसमें विशेष रूप से लेड और अन्य भारी धातुएं शामिल होती हैं। जब कोई गर्म या तेल वाला खाना इस प्रिंट के संपर्क में आता है, तो ये टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) सीधे खाने में मिल जाते हैं, जिससे गंभीर और पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, अखबारों के वितरण के दौरान वे अस्वच्छ परिस्थितियों से गुजरते हैं, जिससे वे बीमारियों का कारण बनने वाले रोगजनकों के वाहक बन जाते हैं।

जवाब: जी हां। 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018' के तहत खाने को स्टोर करने या लपेटने के लिए अखबार या ऐसे किसी भी सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। एफएसएसएआई ने इस संबंध में पहले भी एक एडवाइजरी जारी की थी।

जवाब: यह नियम विशेष रूप से छोटे और मध्यम खाद्य व्यवसायों (एसएमई) को प्रभावित करेगा। इनमें स्ट्रीट फूड वेंडर्स, रेस्टोरेंट, क्लाउड किचन, कैटरर्स, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट, फेरीवाले और मोबाइल फूड वेंडर्स शामिल हैं। इन सभी को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अतिरिक्त तेल सोखने, सामग्री को ढकने या खाना लपेटने के लिए अखबार का इस्तेमाल किसी भी स्तर पर न करें।

जवाब: एफएसएसएआई और राज्य के संबंधित प्राधिकरण मिलकर 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' और इसके नियमों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार का मुख्य फोकस अब खाद्य और पेय (F&B) सेक्टर में सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना है। अखबार में तला हुआ खाना परोसना भले ही पहली नजर में हानिरहित लगे, लेकिन इसके स्वास्थ्य जोखिम बहुत गंभीर हैं। एफएसएसएआई ने साफ निर्देश दिया है कि विक्रेता उपभोक्ताओं की भलाई के लिए केवल सुरक्षित और स्वीकृत 'फूड-ग्रेड' पैकेजिंग सामग्री का ही उपयोग करें। इसके साथ ही, आम लोगों और उपभोक्ताओं से भी इस मामले में सतर्क रहने की अपील की गई है।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/fssai-crackdown-why-wrapping-food-in-newspapers-is-a-health-hazard-and-strictly-prohibited-2026-06-06