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पिछले सात साल से मिश्रा परिवार हम सबके बीच का हिस्सा बना हुआ है। यही कारण है कि साल 2019 में आए ‘गुल्लक’ के पहले सीजन से ही लोग इसके फैन हैं और इसके हर सीजन का इंतजार करते हैं। अब सात साल में ‘गुल्लक’ का पांचवां सीजन आया है।

कहानी इस बार कहानी शुरू होती है संतोष मिश्रा (जमील खान) के घर की पुताई से। हालांकि, पुताई जरूर होती है, लेकिन घर का रंग नहीं बदलता इसलिए घरवालों समेत अधिकतर लोगों को ये लगता ही नहीं है कि पुताई हो चुकी है। घर में वाई-फाई लग गया है, जो ये दिखाता है कि मिश्रा परिवार अब धीरे-धीरे ही सही, लेकिन समय के साथ कदमताल करना शुरू कर चुका है। संतोष मिश्रा सरकारी योजना से अपना खुद का नया घर भी लेने के जुगाड़ में लगे हैं। अन्नू (अनंत जोशी) अब और अधिक जिम्मेदार बनना चाहते हैं और नौकरी में प्रमोशन के जद्दोजेहद में लगे हैं। इसी के साथ डॉ. प्रीति (हेली शाह) से उनका प्यार भी धीरे-धीरे और बढ़ता जा रहा है। अमन (हर्ष मयार) अब स्कूल छोड़ कॉलेज में आ गया है और घर से बाहर दूसरे शहर में रहने लगा है। लेकिन वो कुछ ऐसा भी करता है जिसके बारे में न तो घर वालों को पता है और न ही हम आपको रिव्यू में बता सकते हैं। हालांकि, अगर कुछ नहीं बदला तो शांति (गीतांजलि कुलकर्णी) वो अभी भी घर की देखरेख और संतोष मिश्रा व बच्चों को संभालने में ही लगी हैं। हां इस बार, बिट्टू की मम्मी, माफ कीजिएगा शालिनी (सुनीता राजवार) एक ब्लॉगर बन गई हैं और वो सखी शालिनी महिला ग्रुप की चेयरपर्सन भी बन गई हैं। हालांकि, मिश्रा परिवार उनके साथ-साथ अब उनके इस महिला ग्रुप से भी परेशान है। साथ ही इस बार कहानी में कुछ राज भी हैं, जो खुलते हैं। विलेन का एंगल भी है, लव स्टोरी भी और छोटे-छोटे मगर गहरे सोशल कमेंट तो काफी हैं, जो इस सीरीज को सिर्फ मजाकिया या घरेलू ही नहीं बल्कि जागरुक और जरूरी भी बनाते हैं।

कैसी है ‘गुल्लक’? किसी भी शो को पांच सीजन तक उतना ही मनोरंजक और इंगेजिंग बनाए रखना, जितना पहले सीजन में था, काफी मुश्किल होता है। लेकिन बेशक, गुल्लक ऐसा करती है और आपको सातों एपिसोड तक जोड़े रखती है। हालांकि, इस बार कहीं-कहीं पर ऐसा महसूस होता है कि पिछले चार सीजन के मुकाबले ये थोड़ा और बेहतर हो सकता था। कहीं-कहीं पांचवां सीजन चूकता है। हालांकि, ये ऐसा नहीं है कि आप इसे देख न सकें। गुल्लक ने इस बार भी वो फ्लेवर बनाए रखा है कि अगर एक बार देखने बैठेंगे तो सातों एपिसोड निपटाकर ही उठेंगे। हां, सीरीज में घुसेड़ा गया एक विलेन वाला एंगल जबरन ठुंसा हुआ लगता है, जिससे सीरीज थोड़ी खिंचती है। वहीं अन्नू मिश्रा की लव स्टोरी को भी ढंग से नहीं दिखाया गया है, वो सिर्फ छूकर निकलती है। कहीं न कहीं इसमें ‘पंचायत’ के सचिव जी और रिंकी की लव स्टोरी की झलक दिखती है। पांचवें सीजन में मेकर्स ने कॉमेडी पर कम इमोशंस पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश की है, इसलिए कई बार ये इमोशंस जबरन और ठूंसे हुए लगते हैं। जो सबसे ज्यादा खलता है वो है मिश्रा परिवार की साथ बैठकर की जाने वाली गप्पें और वो नोकझोंक, क्योंकि इस बार किरदारों के अलग-अलग संघर्ष ज्यादा दिखाए गए हैं। जिससे कहीं-कहीं पर आप शायद थोड़ा बोर हो और सीरीज चलते-चलते एक-दो बार अपने मोबाइल के इंस्टा पर अंगूठा फेरो। बाकी टाइम ये सीरीज आपको बांधे रखती है और खुद से जोड़े रखती है। वही अपनापन, वही मिडिल क्लास वाला टच। हां, इस बार सोशल कमेंट भरपूर और अच्छे से हैं। जैसे - ‘तुम मम्मी थोड़े हो, जो बिना पेमेंट के काम करोगे।’ जैसे डायलॉग आपको अंदर तक हिला देते हैं। सीरीज में महिलाओं के मुद्दे से लेकर, फेक फेमिनिज्म, सोशल मीडिया और कैमरे की ताकत व मिस यूज, मिडिल क्लास परिवार में लोन की बड़ी समस्या और बड़ा मुद्दा होना, अंधविश्वास, ऐप के जरिए बढ़ती एस्ट्रोलॉजी यानी ज्योतिष, अपर क्लास वर्सेस लोअर क्लास की जंग, देश के खस्ताहाल, महंगाई, बेरोजगारी, रिश्तों और गरीबी व आम आदमी की समस्याओं जैसे मुद्दों पर सीरीज बखूबी कमेंट करती है। लेकिन इस सबके बावजूद कायम रहा है तो वही अपनापन, वही मिश्रा परिवार की नोकझोंक और मुस्कुराते हुए हर समस्या का हल करने की ताकत।

एक्टिंग पहले सीजन से ही ‘गुल्लक’ में कलाकारों की एक्टिंग टॉप क्लास रही है, जिसमें कौन अच्छा कौन बुरा कहने की गुंजाइश नहीं बचती। इस बार भी एक्टिंग के मामले में कुछ ऐसा ही है। हालांकि, इस बार सबसे बड़ा बदलाव अन्नू भैया के किरदार में आया है, क्योंकि अब अन्नू भैया बदल गए हैं। वैभव राज गुप्ता की जगह अब अनंत जोशी अन्नू भैया बनकर आए हैं। बेशक अनंत जोशी ने शानदार काम किया है, लेकिन वैभव राज गुप्ता की कमी जरूर खलती है। इसकी वजह ये भी है कि गुल्लक परिवार का हिस्सा है और परिवार में कोई अचानक बदल जाए ये हजम होने वाली बात नहीं है। जमील खान इस बार भी बाकी सब पर भारी पड़े हैं और अलग से चमककर सामने आए हैं। उनके एक-एक डायलॉग पर आपको अपनापन महसूस होता है। वो कमाल के मिडिल क्लास लगते हैं और हमें हमारे पापाओं की याद दिलाते हैं। गीतांजलि कुलकर्णी पिछले चार सीजन की तरह इस बार भी शालीन और अपने किरदार में पूरी तरह से उतर गई हैं। हर्ष मयार का किरदार अब हाफ पैंट से फुल पैंट में आ गया है। इसी के साथ उनकी एक्टिंग का लेवल भी बढ़ गया है। उन्होंने फिर अच्छा काम किया है। बिट्टू की मम्मी के रोल में सुनीता राजवार का किरदार हमेशा के लिए यादगार है। यहां भी वो उस किरदार की लीगेसी को बनाए रखती हैं। इसके अलावा हेली शाह समेत बाकी साथी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। छोटे से किरदार में गोपाल दत्त अपना प्रभाव छोड़कर जाते हैं।

निर्देशन-स्क्रीनप्ले गुल्लक के चार सीजन को तीन अलग-अलग निर्देशकों ने निर्देशित किया है। पहले सीजन को अमृत राज गुप्ता ने, दूसरे और तीसरे सीजन को पलाश वासवानी ने और चौथे सीजन को श्रेयांश पांडे ने। अब पांचवें सीजन का निर्देशन श्रेयांश पांडे के साथ अभय राउत ने किया है। निर्देशन में कोई ज्यादा कमी नजर नहीं आती। इसकी वजह ये भी है कि शो का फॉर्मेट और कलाकार सेट हैं, तो निर्देशन में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। हां, राइटिंग के स्तर पर सीरीज और भी मजबूत हो सकती थी। सीरीज के कुछ डायलॉग जैसे ‘बॉस के चरणों में सूरज से ज्यादा विटामिन डी होता है’ और ‘तुम मम्मी थोड़ी हो, जो बिना पेमेंट मजदूरी करोगे’, इस तरह के डायलॉग और होते तो सीरीज और भी बेहतर हो सकती थी। इस बार सीरीज में बाहर की चीजें और किरदारों की अलग-अलग कहानी पर ज्यादा फोकस किया गया है। इससे कई मौकों पर मिश्रा परिवार का वो अपनापन और साथ में बैठकर की जाने वाली गप्पों की कमी खलती है।

Source: https://www.amarujala.com/entertainment/movie-review/gullak-season-5-web-series-review-jameel-khan-geetanjali-kulkarni-anant-joshi-harsh-mayar-tvf-mishra-family-2026-06-05