खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानसून के आगमन के साथ ही उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है। इस बीच सीजन की पहली बारिश के बाद एक्सप्रेस-वे में कुछ जगहों पर गड्ढे हुए।
शामली जिले के गोगवान जलालपुर, हाथी करौदा गांव और ख्यावड़ी कट के पास सड़क धंसने और बड़े-बड़े गड्ढे होने की घटनाएं सामने आई हैं।
सहारनपुर में गागलहेड़ी के पास नन्हेड़ा गाजी गांव में मिट्टी धंसने से एक रेलवे पुल और एक्सप्रेस-वे दोनों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
इसके अलावा, बुटराड़ा से भाज्जू के बीच भी कई स्थानों पर सर्विस रोड और किनारों की मिट्टी धंस गई है, जिससे सड़क के तल के गिरने का खतरा है।
₹12,000-Crore Delhi-Dehradun Expressway Crumbles in First Rain. Just months after its grand inauguration by PM Narendra Modi on April 14, the "world-class" Delhi-Dehradun Expressway has developed severe potholes with the very first monsoon rains, causing heavy damage to… pic.twitter.com/nXLs7nIdIq— Mukesh Prasad (@mksh_prsd) July 2, 2026
₹12,000-Crore Delhi-Dehradun Expressway Crumbles in First Rain. Just months after its grand inauguration by PM Narendra Modi on April 14, the "world-class" Delhi-Dehradun Expressway has developed severe potholes with the very first monsoon rains, causing heavy damage to… pic.twitter.com/nXLs7nIdIq
इस विशेष टीम में एक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी, एनएचएआई के अभियंता, एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता और एक प्राधिकरण अभियंता को शामिल किया गया है।
टीम ने दिल्ली से देहरादून के बीच 23 अलग-अलग जगहों को चिह्नित किया है। इन सभी स्थानों पर कोर कटिंग (सड़क को उखाड़कर) के जरिए दो से तीन सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता परखी जा सके।
जांच दल केवल ऊपरी सतह नहीं, बल्कि सड़क की परतों की भी गहराई से जांच कर रहा है। इसके लिए सड़क की तीनों लाइनों- किनारे की लाइन, मध्य लाइन और बीच के किनारे की लाइन को उखाड़कर उसके मैटेरियल का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर अन्य तकनीकी मानकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
दिन में वाहनों की भीड़ को देखते हुए एसआईटी के अधिकारी रात के समय यह तकनीकी जांच कर रहे हैं। जांच की शुरुआत शुक्रवार शाम को मवीकलां से कर दी गई है और यह पूरी जांच प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चलेगी।
जांच के दौरान किसी जगह ज्यादा गड़बड़ी मिलने पर या कोर कटिंग के समय सुरक्षा के लिहाज से जरूरत पड़ने पर रूट को डायवर्ट भी किया जा सकता है, जो कि अधिकतम छह घंटे के लिए होगा।
इस विस्तृत तकनीकी ऑडिट का मकसद निर्माण में हुई हर छोटी-बड़ी खामी का पता लगाना है, जिसके आधार पर संबंधित ठेकेदार और कंपनियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/delhi-dehradun-expressway-potholes-cracks-sit-investigation-monsoon-rains-nhai-audit-conducts-explained-news-2026-07-12