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अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो जल्द कर लें। 31 जुलाई 2026 आईटीआर भरने की आखिरी तारीख है, जिन्हें टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती। समय पर आईटीआर भरने से आपका टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है, ज्यादा कटा हुआ टैक्स वापस (रिफंड) मिल सकता है और बाद में जुर्माने जैसी परेशानी से बचा जा सकता है।

आईटीआर यानी इनकम टैक्स रिटर्न। यह एक फॉर्म होता है, जिसके जरिए आप आयकर विभाग को बताते हैं कि पूरे साल आपकी कितनी कमाई हुई, उस पर कितना टैक्स कटा या जमा हुआ और अगर ज्यादा टैक्स कट गया है तो उसका रिफंड भी इसी प्रक्रिया के जरिए मिलता है।

अगर आपकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से है और आप ITR-3 या ITR-4 भरते हैं, तो आपके लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है।

इन लोगों को आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए;

जिनके पास भारत या विदेश में कोई मकान, जमीन या दूसरी अचल संपत्ति है।

जिन्होंने शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या ईएसओपी में निवेश किया है।

जिनके बैंक खातों में तय सीमा से ज्यादा नकदी जमा हुई है।

जिनका सालाना बिजली बिल एक लाख रुपये से ज्यादा है।

जिन्होंने विदेश यात्रा पर दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया है।

जिनके कारोबार का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये से ज्यादा है।

रिटर्न भरते समय जल्दबाजी या गलती से बचने के लिए ये दस्तावेज पहले से तैयार रखें;

शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज

होम लोन या किराये से जुड़े दस्तावेज

पैन, आधार और सही बैंक खाते की जानकारी

फॉर्म 16 आपको अपनी कंपनी से मिलेगा, जबकि एआईएस और टीआईएस को आप सीधे इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं, जिसमें आपके पूरे साल के बैंक ब्याज और सभी बड़े वित्तीय लेन-देन का पूरा विवरण होता है। ध्यान रखें कि सिर्फ फॉर्म-16 के आधार पर आईटीआर न भरें। फॉर्म 26AS, एआईएस और टीआईएस में दी गई जानकारी से भी मिलान जरूर करें। इससे आय या टीडीएस की कोई जानकारी छूटने की संभावना कम रहती है और बाद में नोटिस या रिफंड में देरी जैसी परेशानी नहीं होती।

ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और आय वेतन, पेंशन, एक मकान, ब्याज, लाभांश या सीमित कृषि आय जैसे स्रोतों से होती है।

ITR-2: यह उन लोगों के लिए है जो ITR-1 भरने के पात्र नहीं हैं, लेकिन उनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं है।

ITR-3: यह फॉर्म बिजनेस या प्रोफेशन से आय कमाने वाले लोगों के लिए है।

ITR-4 (सुगम): यह उन कारोबारियों और पेशेवरों के लिए है जो अनुमानित कर व्यवस्था (Presumptive Taxation) के तहत टैक्स भरते हैं। गलत फॉर्म चुनने पर आपका आईटीआर अमान्य (Defective Return) माना जा सकता है।

आयकर विभाग करदाताओं को आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के लिए दो तरीके उपलब्ध कराता है। पहला ऑनलाइन और दूसरा ऑफलाइन। दोनों तरीकों में रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका सत्यापन करना अनिवार्य होता है। पहला तरीका: ऑनलाइन आईटीआर भरना

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर जाएं।

अपना पैन (यूजर आईडी) और पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करें।

ई-फाइल > आयकर रिटर्न > आयकर रिटर्न दाखिल करें विकल्प पर क्लिक करें।

रिटर्न दाखिल करने का माध्यम ऑनलाइन चुनें।

रिटर्न दाखिल करना शुरू करें पर क्लिक करें।

करदाता का प्रकार (व्यक्ति, एचयूएफ या अन्य) चुनें।

यदि कोई त्रुटि दिखाई दे तो उसे ठीक करें।

सभी विवरण सही होने पर रिटर्न जमा करें।

इसके बाद रिटर्न का सत्यापन पूरा करें।

अगर रिटर्न भरते समय प्रक्रिया अधूरी रह जाती है, तो अगली बार लॉगिन करने पर सेव किए गए ड्राफ्ट से वहीं से प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है। दूसरा तरीका: ऑफलाइन आईटीआर भरना

आयकर विभाग की वेबसाइट से ऑफलाइन आईटीआर यूटिलिटी डाउनलोड करें।

डाउनलोड की गई फाइल को अनज़िप करके यूटिलिटी खोलें।

रिटर्न > रिटर्न दाखिल करें विकल्प पर जाएं।

पहले से उपलब्ध जानकारी डाउनलोड करें या पहले से तैयार JSON फाइल इम्पोर्ट करें।

सभी अनुभागों की जांच करें और कर की गणना करें।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके JSON फाइल अपलोड करें।

बहुत से लोग सोचते हैं कि फॉर्म जमा करते ही काम पूरा हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। आईटीआर दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है। रिटर्न दाखिल करने के बाद इनमें से किसी एक तरीके से सत्यापन किया जा सकता है।

आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी

डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी)

अगर तुरंत सत्यापन नहीं करते हैं, तो बाद में ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिटर्न सत्यापित करें विकल्प के माध्यम से इसे पूरा किया जा सकता है। अगर ऑनलाइन सत्यापन नहीं किया जाता है, तो हस्ताक्षरित आईटीआर-वी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी), आयकर विभाग, बंगलूरू- 560500 भेजना होगा। अगर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो आपका आईटीआर मान्य नहीं माना जाएगा।

अगर आप तय समय तक आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, तो बाद में भी रिटर्न दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ₹5,000 तक का विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। अगर कोई टैक्स बाकी है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/what-happens-if-you-miss-the-itr-deadline-who-must-file-an-income-tax-return-2026-07-29