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ईरान को लेकर हुए हालिया सैन्य अभियान के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के रवैये पर खुलकर नाराजगी जताई है। ट्रंप ने कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सहयोगी देशों की परीक्षा ले रहे थे कि संकट की घड़ी में कौन अमेरिका के साथ खड़ा होता है। उनका कहना है कि नाटो के कई देशों ने जिस तरह का रुख अपनाया, उससे वह बेहद निराश हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान कुछ सहयोगी देशों ने अमेरिका को पूरा समर्थन नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देशों ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने हवाई अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए भी कई सहयोगी देशों ने सैन्य संसाधन भेजने से इनकार कर दिया। ट्रंप का कहना है कि इसी वजह से उन्हें लगा कि नाटो के सभी सदस्य संकट की घड़ी में समान रूप से साथ नहीं देते। उन्होंने कहा, "मैं लोगों की परीक्षा ले रहा था और मैं नाटो से बहुत निराश हूं।"
ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका की रणनीति का समर्थन नहीं किया। ट्रंप के मुताबिक, मेलोनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान से जुड़े अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे दोनों नेताओं के रिश्तों में कुछ दूरी आई। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि वह मेलोनी को व्यक्तिगत रूप से पसंद करते हैं और उन्हें अच्छा इंसान मानते हैं, लेकिन इस मामले में उन्होंने गलत फैसला लिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि यूरोप के कई देश खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल संसाधन हैं और उसे होर्मुज पर अपनी जरूरतों के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ता।
ट्रंप ने तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ईरान और पूरे क्षेत्र की स्थिति की अच्छी समझ है। उन्होंने कहा कि तुर्किये ने तनाव कम करने के प्रयासों में रचनात्मक भूमिका निभाई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि तुर्किये के पास मजबूत सैन्य क्षमता होने के बावजूद उसने सीधे सैन्य संघर्ष में शामिल होने का फैसला नहीं किया। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य व्यापक युद्ध छेड़ना नहीं था, बल्कि ईरान की परमाणु क्षमता को रोकने के लिए सीमित सैन्य अभियान चलाना था। उन्होंने विश्वास जताया कि एर्दोआन भी नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे।
ट्रंप के बयान से साफ संकेत मिलता है कि वह नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से अधिक संदेह में हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका वर्षों से अपने सहयोगियों की रक्षा करता आया है, लेकिन हालिया घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सभी सहयोगी समान जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। अंकारा में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन में मध्य पूर्व की स्थिति, ईरान संकट और सदस्य देशों के बीच रक्षा जिम्मेदारियों का मुद्दा प्रमुख एजेंडा बना हुआ है। ट्रंप की टिप्पणी से यह भी संकेत मिला है कि आने वाले समय में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के संबंधों पर इस बहस का असर पड़ सकता है।
Source: https://www.amarujala.com/world/donald-trump-on-nato-was-testing-them-why-is-he-angry-over-allies-response-to-iran-crisis-2026-07-08