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CBSE OSM Row: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की चल रही कक्षा 12वीं की री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया को लेकर एक बड़ी खबर आई है। बोर्ड ने सुरक्षा और परिचालन पर अधिक नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े सभी डाटा और रिकॉर्ड को प्राइवेट वेंडर कोएम्प्ट एडटेक प्राइवेट लिमिटेड (COEMPT Eduteck Pvt Ltd) के सर्वर से हटाकर अपने नियंत्रण वाले सर्वर पर ट्रांसफर कर दिया है।
सुरक्षा ऑडिट से जुड़े आईआईटी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पहले स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं और उनसे जुड़ा डाटा वेंडर के सर्वर पर होस्ट किया गया था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब पूरे डाटा को सीबीएसई के सर्वर पर लाया गया है। इसके साथ ही, तकनीकी टीमों ने ओएसएम (OSM) कोड की समीक्षा करके उसमें सुधार किया है, ताकि यह सीबीएसई के अपने इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) पर सुचारू रूप से चल सके। अधिकारी ने कहा, 'जब सुरक्षा की बात आती है, तो सिस्टम का पूरी तरह से किसी वेंडर के सर्वर पर निर्भर रहने के बजाय सीबीएसई के अपने नियंत्रण में होना स्वाभाविक रूप से कहीं बेहतर है।'
जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या विवादों और पुराने ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद कोएम्प्ट कॉपियों को ठीक से स्कैन कर पाएगा? तो उन्होंने आंकड़ों के साथ जवाब दिया:
वेंडर ने पहले चरण में कुल 40 करोड़ पेज स्कैन किए थे।
इनमें से केवल लगभग 30,000 पेजों में ही समस्याएं (जैसे धुंधलापन या तकनीकी दिक्कतें) पाई गईं।
इसका मतलब है कि प्रति 10,000 पेजों में से केवल 1 पेज पर समस्या थी।
अब री-इवैल्यूएशन के दौरान केवल प्रभावित या समस्या वाले पेजों को ही स्कैन किया जाना है, इसलिए कंपनी इसे बिना किसी परेशानी के पूरा कर लेगी। इस संक्रमण काल (Transition) के दौरान कोएम्प्ट के अधिकारी भी तकनीकी टीमों के साथ जुड़े रहे और डेटा माइग्रेशन व सुरक्षा उपायों को लागू करने में मदद की।
शिक्षा और रोजगार के लिहाज से यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हजारों छात्रों का करियर इन नंबरों पर निर्भर करता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4 जून तक बोर्ड को पोस्ट रिजल्ट ग्रीवांस रीड्रैसल तंत्र (Post-result grievance redressal mechanism) के माध्यम से कुल 70,433 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
यह पूरा बदलाव उस विवाद और सुरक्षा चिंताओं के बाद आया है, जब एथिकल हैकर 'निसर्ग' द्वारा ओएसएम पोर्टल में कुछ कमियां (Vulnerabilities) उजागर की गई थीं। इसके तुरंत बाद सीबीएसई ने सिस्टम को मजबूत करने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की टीमों को नियुक्त किया।
आईआईटी कानपुर की साइबर सुरक्षा टीम ने सीबीएसई रजिस्ट्रेशन पोर्टल और ओएसएम री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर 10 से अधिक दिनों तक काम किया।
सुरक्षा को कड़ा करने के लिए 'रेड टीम' (कमियां ढूंढने वाली) और 'ब्लू टीम' (कोड को मजबूत करने वाली) पद्धति का इस्तेमाल किया गया।
डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) ने कोड को मजबूत करने का नेतृत्व किया, जबकि आईआईटी कानपुर ने पेनिट्रेशन और वल्नरेबिलिटी टेस्टिंग (सेंधमारी जांच) की।
यह सुरक्षा समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि 3 जून को सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन प्लेटफॉर्म पर लगभग 3.8 मिलियन पैकेट्स का एक बड़ा डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) साइबर हमला हुआ था। हालांकि, तकनीकी टीमों की मुस्तैदी से इस हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया और सेवाएं लगातार चालू रहीं। आईआईटी अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि अब तक बनाए गए सिस्टम से किसी भी प्रकार के डाटा लीक या सेंधमारी का कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे छात्रों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है।
Source: https://www.amarujala.com/education/coempt-will-continue-scanning-answer-sheets-all-data-records-shifted-to-cbse-s-servers-for-greater-control-2026-06-06