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अमर उजाला की मुहिम आखिरकार रंग लाई और हजरतगंज नरही स्थित विद्या बालिका गर्ल्स हाईस्कूल बेटियों को वापस मिल गया। बुधवार को हजरतगंज थाने की उसी पुलिस ने ताला खुलवाना पड़ा जिस पुलिस ने बीते 4 जून को एडीएम कोर्ट का हवाला देकर दिन दहाड़े विपक्षी पार्टी को विद्यालय पर कब्जा दे दिया था। इसके बाद अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
हजरतगंज पुलिस ने ताला खुलवाया, लेकिन मौके पर पूरा सामान नहीं मिला। जबकि मैदान में पहले दिन पंखे अलमारी, विद्यालय से जुड़े दस्तावेज पड़े हुए थे। आशंका है कि विद्यालय के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है।
गेट खुलने के बाद अंदर फर्नीचर टूटा हुआ मिला है। वहीं विद्यालय का बोर्ड भी गायब है। प्रबधंक ने इस संबंध में पुलिस से जानकारी मांगी पुलिस कुछ जवाब नहीं दे सकी है।
अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से मुद्दे को उठाए जाने के बाद इस मामले में एडीएम पूर्वी का बीते 21 अप्रैल का अपना ही आदेश पलटना पड़ा। इसके बाद हजरतगंज पुलिस को वापस विद्यालय प्रबंधक को कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया गया।
एडीएम के आदेश के बाद भी हजरतगंज पुलिस की लापरवाही दिखी। दो पहले एडीएम ने प्रबंधक को कब्जा दिलाने का आदेश हजरतगंज पुलिस को दिया था, लेकिन पुलिस बुधवार की दोपहर तक हीलाहवाली करती रही। हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह प्रक्रिया का ही हवाला देते रहे।
8 जून को अपर जिला अधिकारी नगर पूर्वी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को देखने के बाद न्यायालय की ओर से वाद संख्या डी-202510460002316 धारा 36 (2) नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत पारित आदेश 21 अप्रैल 2026 स्थगित किया जाता है। एडीएम के आदेश में कहा गया कि यदि कब्जा हस्तगत करा दिया गया है तो पूर्व की भांति विद्यालय प्रबंधन को तत्काल कब्जा दिलाकर न्यायालय को पूरी रिपोर्ट दें। आदेश में ये भी कहा कि तत्काल कब्जा इसलिए दिलाया जाए ताकि छात्राओं की पढ़ाई न प्रभावित हो।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों कहना है कि जिस भवन में विद्यालय चल रहा है उसी भवन पर मान्यता दी गई है। शिक्षकों को वेतन भी सरकार दे रही है। ऐसे में विद्यालय बिना निदेशक की अनुमति के नहीं बंद किया जा सकता है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शैक्षिक संस्थायें अधिनियम 1974 कहता है कि प्रत्येक संस्था की शुरुआत होने के दिन से संस्था निदेशक के अधीन हो जाती है। उसके बाद तभी कुछ हो सकता है जबतक निदेशक की अनुमति न हो।
विद्यालय का ताला खुलते ही प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यदि अमर उजाला हमारे साथ नहीं खड़ा होता तो विद्यालय हाथ से जा चुका था। अब हम विद्यालय को पहले और बेहतर बनाएंगे। विद्यालय किसी भी दशा में बंद नहीं होने देंगे।
Source: https://www.amarujala.com/lucknow/up-girls-get-their-school-back-police-have-the-vidya-balika-school-unlocked-students-had-been-staging-a-s-2026-06-10