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कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में मनमानी करने का फैसला किया है। उन्होंने आगे कहा मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने उन सभी फाइलों पर नियंत्रण रखा है, जो सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सीबीआई जांच का हिस्सा होनी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को सीबीआई को अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक कार्यों के लिए ठेकों के तरजीही आवंटन के आरोपों की प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया। जिसमें आरोप लगाया गया है कि ये ठेके मुख्यमंत्री खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली या उनसे संबंधित कंपनियों को दिए गए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि खंडू के मामले में भाजपा ने सभी सिद्धांतों और मानदंडों को त्याग दिया है। यह सर्वोच्च न्यायालय का अपमान है।
रमेश ने एक्स पर लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट की ओर से वहां के मुख्यमंत्री के फैसले की सीबीआई जांच का आदेश दिए। इसके बावजूद, भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में बेशर्मी से काम लेने का स्पष्ट फैसला लिया है।' कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव ने कहा, 'मुख्यमंत्री अभी भी सार्वजनिक कल्याण मंत्री हैं और इसलिए सीबीआई जांच में शामिल होने वाली सभी फाइलों पर उनका नियंत्रण है। सभी सिद्धांतों और मानदंडों को दरकिनार कर दिया गया है।'
यह भी पढ़ें- West Bengal: वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद गिरफ्तार, अब तक तीन पहुंचे जेल 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन' उन्होंने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय, अरुणाचल प्रदेश की जनता और भारत के संविधान का अपमान है। पिछले महीने कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री खांडू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद उन्हें पद से क्यों नहीं हटाया गया है।रमेश ने कहा था कि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का घोर उल्लंघन है।
उन्होंने कहा था कि 6 अप्रैल, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीआई को उन आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया था कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के परिवार को जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 तक 10 वर्षों में 1,270 करोड़ रुपये के ठेके सीधे हितों के टकराव में दिए गए थे। यह देखते हुए कि राज्य और उसके तंत्र किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक पदाधिकारी की मनमानी के अनुसार लाभ नहीं दे सकते। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यह एक ऐसा मामला है जहां स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि जहां कोई मामला सार्वजनिक खरीद की अखंडता से संबंधित है और इसमें उच्चतम स्तर पर हितों के टकराव के आरोप शामिल हैं, वहां जांच न केवल निष्पक्ष होनी चाहिए बल्कि निष्पक्ष प्रतीत भी होनी चाहिए।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/contract-scam-congress-accuses-arunachal-cm-of-maintaining-control-over-files-despite-supreme-court-order-2026-06-03