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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बेजला उरांव की अपील स्वीकार कर ली।

कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी यह साबित नहीं कर सके कि ऐसा कोई रिवाज मौजूद है। इसलिए वादी के पक्ष में फैसला दिया गया।

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि किसी भी परंपरा या रिवाज को साबित करने की जिम्मेदारी उसी पक्ष की होती है, जो उसका दावा करता है।

कोर्ट ने यह दावा भी खारिज कर दिया कि लेदुरा उरांव अपनी भांजी के पति पुनई उरांव को घरदामाद बनाकर गोद ले सकते हैं और इस आधार पर उसे अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी बना सकते हैं।

पीठ ने कहा, यह कहीं भी साबित नहीं हुआ कि प्रचलित परंपरा के तहत कोई व्यक्ति अपनी भांजी के पति को घरदामाद के रूप में गोद ले सकता है।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/sc-rejects-inheritance-claim-based-on-unproved-ghardamad-adoption-under-oraon-custom-2026-07-09