भूख और कामेच्छा मानव शरीर के बहुत पुराने संस्कारों में से हैं. केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी अपने जीवन-चक्र में इन दोनों प्रवृत्तियों से होकर गुजरते हैं. जीवन की विकास-यात्रा में हमारा मन और शरीर इन संस्कारों को धारण करते आए हैं.
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