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भारत में पिछले एक दशक में ऋण की मांग और उसकी पहुंच में काफी बदलाव देखने को मिले हैं, जिसमें औपचारिक रिटेल ऋण की पहुंच पिछले कुछ वर्षों में दोगुनी हो गई है। मार्च 2017 में एक बार ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 में 74 प्रतिशत हो गई है। जबकि ऋण के लिए पात्र लोगों की संख्या 79 करोड़ से बढ़कर 89 करोड़ हो गई है। ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ताओं की सक्रीय भागीदारी में भी तेज वृद्धि हुई है, जिससे ऋण सक्रिय उपभोक्ताओं का अनुपात 11 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है। उपभोग आधारित ऋण इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है। जिसमें व्यक्तिगत ऋण (पर्सनल लोन) क्रेडिट कार्ड और उपभोक्ता टिकाऊ उत्पादों के लिए ऋण मुख्य रूप से बढ़े हैं।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/formal-retail-lending-sees-major-expansion-890-million-now-eligible-for-credit-2026-08-01