मजहबी ध्रुवीकरण की स्थिति में बसपा की चिंता है कि वोटर सपा और भाजपा के बीच बंट सकते हैं. ऐसी स्थिति में बसपा को करारा झटका लगेगा. यही कारण है कि मायावती नहीं चाहतीं कि यह मामला तूल पकड़े और चुनावी मुद्दा बने.

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