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केरल हाई कोर्ट ने एक महिला को बड़ी राहत दी है। दरअसल महिला को 2016 में अपने 15 महीने के बच्चे की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। अदालत ने कहा कि घटना के समय महिला गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही थी और उसने आत्महत्या की भी कोशिश की थी। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को लागू करते हुए बरी कर दिया है। यह कानून आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को मानसिक तनाव की स्थिति में मानता है और सजा से सुरक्षा भी देता है।

यह अधिनियम, 2018 में लागू हुआ था, पहले केरल उच्च न्यायालय द्वारा पूर्वव्यापी प्रभाव वाला माना गया था। मौजूदा मामले में, उच्च न्यायालय ने कहा कि जब 2021 में मुकदमा शुरू हुआ था तब यह अधिनियम लागू था और इसलिए, सत्र न्यायालय को इसे ध्यान में रखना चाहिए था।

कोर्ट ने क्या कहा? न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और केवी जयकुमार की पीठ ने कहा कि महिला ने पैरासिटामोल की गोलियों की काफी मात्रा का सेवन करके आत्महत्या करने का प्रयास किया था। उसने अपनी कलाई पर किसी नुकीली वस्तु से चोटें पहुंचाई थीं। इसके साथ ही इस काम को अंजाम देने से पहले एक आत्महत्या नोट भी लिखा था जिससे पता चलता है कि वह गंभीर मानसिक तनाव में थी।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/killed-child-first-then-akilled-child-first-then-attempted-suicide-kerala-high-court-overturns-verdict-acquits-woman-ttempted-suicide-kerala-high-court-overturns-verdict-acquits-woman-2026-06-12