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’पेपर लीक्ड नीट’ और ‘री-नीट 2026’ जैसे नाम वाले टेलीग्राम चैनल खुलेआम 22 लाख छात्रों के खिलाफ जबरन वसूली रैकेट चला रहे थे।14000-25000 रुपये तक वसूल रहे थे स्कैमर्स छात्रों से नकली पेपर के लिए कुछ मामलों में मांगी गई रकम 10 लाख रुपये तक थी। पैसा मिलते ही स्कैमर्स गायब हो जाते थे।

ऐसे मामले वित्तीय धोखाधड़ी जैसे हैं, जिसे सामग्री की निगरानी (कंटेंट मॉडरेशन) से नियंत्रित करना संभव नहीं है।

भारत ने इन चैनलों को एक-एक करके हटाने की कोशिश की। लेकिन, पुराने चैनलों के हटने से ज्यादा तेजी से नए चैनल सामने आ जाते थे।

भारत में टेलीग्राम का कोई रजिस्टर्ड ऑफिस नहीं है। कोई शिकायत अधिकारी नहीं है और भारतीय कानून के तहत कोई कानूनी जवाबदेही की प्रणाली भी नहीं है।

टेलीग्राम के खिलाफ ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि अहम सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान चैनल पर अस्थायी रोक लगा दिया जाता है।

वियतनाम ने 2025 में टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था। वहां की पुलिस को पता चला कि देश में चल रहे 68 फीसदी टेलीग्राम चैनल और ग्रुप कानून का उल्लंघन कर रहे थे। इनमें धोखाधड़ी,ड्रग तस्करी और आतंकवाद जैसे मामले शामिल थे।

केन्या ने राष्ट्रीय परीक्षाओं के दौरान तीन सप्ताह तक टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था।

अल्जीरिया, सीरिया और जॉर्डन ने हाई स्कूल डिप्लोमा परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/neet-ug-telegram-faces-concerns-unanswered-legal-cases-and-lack-of-cooperation-2026-06-18