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फुटबॉल की दुनिया में महानतम खिलाड़ी को लेकर बहस कभी खत्म नहीं होती, लेकिन जब आंकड़ों, उपलब्धियों और मैदान पर जादू की बात आती है तो लियोनल मेसी का नाम सबसे आगे दिखाई देता है। 24 जून 1987 को अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में जन्मे मेसी आज 39 साल के हो गए हैं। उनका यह जन्मदिन इसलिए भी खास है क्योंकि वह फीफा विश्व कप 2026 में शानदार फॉर्म में हैं। मेसी ने विश्वकप में ओवरऑल मिरोस्लाव क्लोज के सबसे ज्यादा गोल का रिकॉर्ड तोड़ा और फिलहाल पांच गोल के साथ टूर्नामेंट के शीर्ष गोल स्कोरर बने हुए हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया एक बार फिर उस खिलाड़ी का जश्न मना रही है जिसने अपने करियर में लगभग हर सपना पूरा किया।
बीमारी से जंग, फिर दुनिया पर राज आज जिस खिलाड़ी को दुनिया फुटबॉल का भगवान कहती है, उसका बचपन संघर्षों से भरा था। महज 11 साल की उम्र में मेसी को ग्रोथ हार्मोन डेफिशिएंसी नामक बीमारी हो गई थी। इस बीमारी के कारण उनका शारीरिक विकास रुक गया था और इलाज बेहद महंगा था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि लगातार इलाज का खर्च उठा सके। तभी स्पेनिश क्लब बार्सिलोना ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और इलाज का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया। कहा जाता है कि मेसी का पहला अनुबंध एक नैपकिन पेपर पर लिखा गया था। वही नैपकिन आगे चलकर फुटबॉल इतिहास की सबसे चर्चित कहानियों में शामिल हो गई।
बार्सिलोना में शुरू हुआ स्वर्णिम युग बार्सिलोना पहुंचने के बाद मेसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अगले डेढ़ दशक तक उन्होंने क्लब फुटबॉल पर लगभग एकछत्र राज किया। बार्सिलोना के लिए उन्होंने 778 मैचों में 672 गोल किए और क्लब के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ गोल स्कोरर बने। उनके नेतृत्व में बार्सिलोना ने 10 ला लीगा, 4 यूईएफए चैंपियंस लीग, 7 कोपा डेल रे और कई अन्य ट्रॉफियां जीतीं। साल 2012 उनके करियर का सबसे ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ, जब उन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में 91 गोल दागकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में गिना जाता है।
आलोचनाओं से टूटे, संन्यास लेकर दुनिया को चौंकाया मेसी के करियर का सबसे भावुक पल 2016 में आया। अर्जेंटीना लगातार बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल हार रहा था और कोपा अमेरिका फाइनल में चिली के खिलाफ पेनाल्टी चूकने के बाद मेसी बुरी तरह टूट गए। मैच के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। यह खबर सुनकर अर्जेंटीना ही नहीं, पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसक स्तब्ध रह गए। आलोचकों का मानना था कि मेसी दबाव में बड़े खिताब नहीं जिता सकते। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
वापसी जिसने इतिहास बदल दिया अर्जेंटीना की जनता, पूर्व खिलाड़ियों और देशभर से उठी भावनात्मक अपीलों के बाद मेसी ने अपना फैसला बदला और राष्ट्रीय टीम में लौट आए। इसके बाद उन्होंने वह कर दिखाया जिसका इंतजार करोड़ों अर्जेंटीनी वर्षों से कर रहे थे। 2021 में अर्जेंटीना को कोपा अमेरिका जिताकर उन्होंने 28 साल का खिताबी सूखा खत्म किया। इसके बाद 2022 में फाइनलिसिमा और फिर विश्व कप जीतकर उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी कमी भी पूरी कर ली। उनकी वापसी फुटबॉल इतिहास की सबसे सफल वापसी में गिनी जाती है।
कतर 2022: जब अधूरी कहानी पूरी हुई विश्व कप ट्रॉफी की कमी ही वह तर्क था जिसके आधार पर कई लोग मेसी को डिएगो माराडोना से नीचे रखते थे। लेकिन कतर 2022 ने यह बहस लगभग समाप्त कर दी। फ्रांस के खिलाफ रोमांचक फाइनल में मेसी ने दो गोल किए और अर्जेंटीना को तीसरा विश्व कप दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात गोल और तीन असिस्ट दर्ज किए तथा गोल्डन बॉल भी जीती। विश्व कप जीतने के बाद दुनिया ने उस तस्वीर को देखा जिसमें मेसी ट्रॉफी को सीने से लगाए खड़े थे। वह पल फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार दृश्यों में शामिल हो गया। रिकॉर्ड्स जिनके आसपास भी पहुंचना मुश्किल मेसी के नाम ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें तोड़ना आने वाले वर्षों में बेहद मुश्किल माना जाता है।
विश्व कप, कोपा अमेरिका, चैंपियंस लीग और लीग खिताब जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल
इन आंकड़ों ने उन्हें खेल इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में जगह दिलाई है।
Source: https://www.amarujala.com/sports/football/lionel-messi-incredible-journey-on-his-39th-birthday-from-retirement-shock-to-world-cup-glory-stats-records-2026-06-24