कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में उन्होंने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा। लेकिन क्या सारी बातें यहीं तक सीमित रह जाएंगी या या फिर इसका कोई भविष्य दिखाई पड़ता है? ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई।
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कॉकरोच जनता पार्टी बीते कई दिनों से सोशल मीडिया ट्रेंड कर रही है। ये पार्टी शनिवार को एक नए पड़ाव पर दिखी, जब सुबह-सुबह जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में लोगों का हुजूम दिखाई पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों को एक साथ जंतर-मंतर जैसी जगह पर जुटाना और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगना यह सारी बातें क्या यहीं तक सीमित रह जाएंगी या फिर इसका कोई भविष्य दिखाई पड़ता है? कुछ ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल और गुंजा कपूर मौजूद रहीं।
समीर चौगांवकर: मुझे लगता है कि कॉकरोच जनता पार्टी का उदय इतनी जल्दी हुआ कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। रातोंरात सोशल मीडिया प्लेटफार्म बन जाते हैं और करोड़ों लोग उसको फॉलो करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर उसके फॉलोअर्स की संख्या भारतीय जनता पार्टी से भी ज्यादा हो जाती है। इसका मतलब ये नहीं है कि ये सभी आपको वोट करने लग जाएंगे। हमने पहले भी कई उदहारण देखें जब किसी के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर्स होते हैं पर जब वोट की बारी आती है तो कुछ हजार वोट भी नहीं मिले। जिस तरीके से घटनाएं घटी थीं, सीजीआई का जो बयान बयान आया था, उसको लेकर उसके बाद पार्टी बन गई। अभिजीत दीपके जो खुद अभी यूएस से आज सुबह लौटे हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रहे हैं। अब आप तीन प्रवक्ताओं के नाम देख लें। तीनों का आप बैकग्राउंड देखें तो ऐसा जमीनी स्तर से कोई जुड़ा हुआ नहीं है। मुझे लग रहा है कि ऐसे आंदोलन पर तो एकदम जनता बहुत भरोसा करेगी नहीं। मुझे इसके राजनीतिक ताकत बनने की संभावना कम नजर आ रही है।
पीयूष पंत: आज भी जो जुटान है वहां पर उससे ये लग नहीं रहा है कि वो किसी आर-पार वाले मूड में हैं। देखिए जब कोई भी आंदोलन होता है या कोई प्रयास होता है तो वो लंबा चलता है। मुझे लगता है ये एक सटैरिकल वे में जिससे सीजीआई साहब ने एक बात कही कॉकरोच को लेकर के और दीपके के दिमाग में आया कि हां कुछ होना चाहिए यार। इस पर उन्होंने एक सटायर कैंपेन चालाया और उसमें एक वेबसाइट बना डाली। जब इतना अधिक सपोर्ट आ गया तो वो एक तरह के दबाव में आ गए। तमाम तरफ से आने लगा कि हां आपको ये करना चाहिए वो करना चाहिए। फिर उसी मजाक-मजाक में पार्टी बन गई। सरकार को भी पता है कि ये खतरा नहीं है। सरकार का जो रवैया है उसमें मुझे लगता है कि अभी सरकार इससे कहीं डगमगाने वाली नहीं है। ये कहीं से भी राजनीतिक नहीं है।
गुंजा कपूर: देखिए मैं एक बात बताऊं भारत बदल गया है। आप अपने अमर उजाला में देखिए मैंने देखा यहां पर छह सिल्वर बटन लगे हैं और आपके पास एक गोल्डन बटन है। आपका चैनल अक्रॉस बॉर्डर देखा जाता है। दिस इज द पावर ऑफ सोशल मीडिया। आई थिंक जिस तरीके से कम्युनिकेशन पहले होता था वो बदल रहा है। जिस चीज को पहले करने में तीन साल लगते थे वो अब तीन हफ्ते में हो जाती है। मुझे लगता है कि थोड़ा इसको अंडरएस्टिमेट कर देना होगा। ये कहीं ना कहीं ना मुझे विपक्ष को बहुत वीक दिखाता है। क्योंकि ये काम विपक्ष का था। ये वो पीढ़ी है जिसने 12 साल तक सिर्फ नरेंद्र मोदी को देखा है। तो जो आज 17 साल का युवा है उसे वो तो पांच साल का था जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए। तो उसे तो भारत के लिए और कोई अल्टरनेटिव पता ही नहीं है। तो आज उसके लिए जितनी शॉर्ट कमिंग्स हैं वो इस सरकार की वजह से है। तो उसका आक्रोश भी इस सरकार से है। ये सिर्फ एक सैटरडे आउटिंग नहीं है।
राकेश शुक्ल: सुप्रीम कोर्ट के कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद जिस तरीके से एक कटाक्ष सोशल मीडिया पर आया और उस कटाक्ष को इंजॉय करने के लिए जो एक समूह आया मुझे लगता है दीपके जी के मन में भाव पैदा कर दिया कि वो भी बालेन शाह बन सकते हैं। इसीलिए वो अमेरिका से उड़े और भारत लैंड कर गए। आप देखिए यह कॉकरोच वाला अभी भी व्यंग्य की शैली पर ही चल रहा है। इसके अलावा कहीं भी जमीनी स्तर पर ये नहीं है। अब जमीन पर आने के बाद समझ में आएगा कि भारत का जेन-जी क्या है?
विनोद अग्निहोत्री: ये तो सही है कि जो नई जनरेशन होती है उसके अंदर कुछ ना कुछ करने का हौसला होता है। 15-16 साल से लेकर 25 साल तक की उम्र का जो दौर होता है वो दुनिया को बदलने का दौर होता है। 70 साल से ज्यादा उम्र थी जेपी की लेकिन वो छात्रों के नेता बने। जो युवा हैं मतलब ऐसे युवाओं ने 12 साल नरेंद्र मोदी का शासन देखा है। उनके अंदर एक बेचैनी, एक असंतोष तो है और इसको हम अनदेखा नहीं कर सकते। अब उस असंतोष को सुर कौन देगा यह अलग सवाल है। शुरुआत तो दीपके जी ने कर दी। उनका एक पर्पस तो पूरा हो गया। इसके पहले अभिजीत दीपके को कौन जानता था? वो एक ट्रिगर बन गए। अब सब लोगों का बैकग्राउंड पता हो गया कि वो दलित समुदाय से आते हैं। वो आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। तो इसलिए मुझे लगता है कि वो तो एक पर्सनालिटी बन गए, लेकिन फिर मैं कहूंगा कि ये ज्वार है। अब देखना होगा क्या ज्वार रुकेगा या भाटा बन के बैठ जाएगा।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/khabaron-ke-khiladi-cockroach-janata-party-reached-jantar-mantar-from-social-media-analysts-told-what-next-2026-06-06