दरअसल, विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जो बजट दिया जाता है, उसकी पारदर्शिता के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होता है. बिहार कोषागार संहिता 2011 के नियम 271 के अनुसार बजट अलॉट करने की तारीख से 18 महीने के अंदर उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है. लेकिन विभिन्न विभागों के 62 हजार 632 उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी जमा नहीं हुए हैं. इसमें 2019-20 से पहले की 21 हजार 515 करोड़ रुपए की राशि भी शामिल है.

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