खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्रों ने देश की राजनीति, प्रशासन और शासन व्यवस्था को दशकों तक दिशा दी।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे।
वी.पी. सिंह और नारायण दत्त तिवारी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे, जबकि चंद्रशेखर ने यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।
पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा, विजय बहुगुणा, रीता बहुगुणा जोशी, मुरली मनोहर जोशी, मदन लाल खुराना, अर्जुन सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी और जनेश्वर मिश्र जैसे अनेक राष्ट्रीय नेता भी इसी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। इतना ही नहीं, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी यहां शिक्षा प्राप्त की।
राहुल गांधी के अभियान का तीसरा पड़ाव पटना है। राहुल 11 जुलाई को पटना जाने वाले हैं।
बिहार भारत की शिक्षा परंपरा का प्राचीन केंद्र रहा है। 5वीं शताब्दी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम द्वारा स्थापित नालंदा महाविहार केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का ज्ञान केंद्र था।
नालंदा विश्वविद्यालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार यहां एक समय लगभग 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे।
चीन के प्रसिद्ध यात्री ह्वेनसांग और इत्सिंग ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इसकी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख किया है।
यहां बौद्ध दर्शन के अलावा गणित, चिकित्सा, खगोलशास्त्र, व्याकरण, तर्कशास्त्र और राजनीति जैसे विषय पढ़ाए जाते थे।
नालंदा के अलावा विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी बिहार की ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
औपनिवेशिक काल में बिहार की शिक्षा व्यवस्था ने नया रूप लिया। 1863 में स्थापित पटना कॉलेज और 1917 में स्थापित पटना विश्वविद्यालय ने आधुनिक उच्च शिक्षा की नींव रखी।
पटना विश्वविद्यालय को भारतीय उपमहाद्वीप का सातवां सबसे पुराना विश्वविद्यालय माना जाता है। यह विश्वविद्यालय लंबे समय तक पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र रहा।
यहीं से देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और अनेक प्रशासक, न्यायविद व शिक्षाविद निकले।
पिछले दो से तीन दशकों में पटना की पहचान एक नए रूप में उभरी है। आज यह पूर्वी भारत का प्रमुख कोचिंग हब माना जाता है।
बोरिंग रोड, मुसल्लहपुर हाट, राजेंद्र नगर, कंकड़बाग, आशियाना और बहादुरपुर जैसे इलाके हजारों प्रतियोगी छात्रों से भरे रहते हैं।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से छात्र यहां UPSC, BPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, CUET, NDA और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।
दिल्ली की तुलना में यहां कोचिंग फीस, किराया और जीवनयापन की लागत अपेक्षाकृत कम होने से मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए यह अधिक सुलभ विकल्प बन गया है।
राहुल गांधी के अभियान का अंतिम पड़ाव दिल्ली है। भारत की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक शक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा राजधानी भी मानी जाती है।
इसकी शैक्षिक विरासत मध्यकालीन दौर से शुरू होती है, जब दिल्ली सल्तनत और मुगल शासन के दौरान यहां मदरसों, पुस्तकालयों और विद्वानों को संरक्षण मिला।
मुगल काल में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) फारसी, अरबी, गणित, खगोलशास्त्र और इस्लामी अध्ययन का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिक शिक्षा की नींव यहां ब्रिटिश शासन के दौरान मजबूत हुई।
1922 में स्थापित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने राजधानी को उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बना दिया।
इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (1969), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (1920, दिल्ली में 1925 से), IIT दिल्ली (1961), AIIMS (1956) और बाद में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU Delhi) जैसे संस्थानों ने दिल्ली को देश के सबसे बड़े अकादमिक केंद्र के रूप में स्थापित किया।
आज NIRF रैंकिंग में शामिल कई शीर्ष विश्वविद्यालय और संस्थान दिल्ली में स्थित हैं।
दिल्ली का मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर पिछले तीन दशक में दिल्ली की एक और पहचान बनी है, देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में। विशेष रूप से मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर UPSC अभ्यर्थियों की राजधानी माने जाते हैं। यहां हर साल देशभर से हजारों छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा करोल बाग, बेर सराय और लक्ष्मी नगर जैसे इलाके SSC, बैंकिंग, CAT, CLAT, CUET, GATE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। केवल ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्र में ही हजारों अभ्यर्थी किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर UPSC की तैयारी करते हैं। दिल्ली का कोचिंग उद्योग हजारों करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था में बदल चुका है, जिसमें कोचिंग संस्थान, पुस्तक बाजार, हॉस्टल और छात्र सेवाएं शामिल हैं।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/rahul-gandhi-s-education-rally-why-were-these-four-major-education-and-exam-hubs-chosen-2026-06-17