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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, नई तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को नई दिशा देगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध आजादी से पहले ही शुरू हो गए थे।
वर्ष 1941 में भारत ने सिडनी में अपना पहला व्यापार कार्यालय खोला था।
इसके बाद 1944 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत में अपना पहला उच्चायुक्त नियुक्त किया।
समय के साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते गए।
साल 2009 में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया।
इसके बाद जून 2020 में इसे बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी बना दिया गया।
इसके बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, कृषि और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा। आज ऑस्ट्रेलिया उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके साथ भारत हर साल प्रधानमंत्री स्तर की बैठक करता है।
दोनों देश क्वाड, जी-20 और ईस्ट एशिया समिट जैसे मंचों पर भी साथ मिलकर काम करते हैं।
मोरारजी देसाई ऑस्ट्रेलिया का आधिकारिक दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे। उन्होंने फरवरी 1978 में राष्ट्रमंडल देशों के प्रमुखों के सम्मेलन (CHOGM) में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था।
इसके बाद इंदिरा गांधी ने अक्तूबर 1981 में सीएचओजीएम सम्मेलन के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया।
राजीव गांधी ने 1986 में ऑस्ट्रेलिया की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा की।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 21 से 24 नवंबर 2018 तक ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया यात्रा थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया का तीन बार दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने पहली बार 2014 में जी-20 शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठक के लिए, दूसरी बार 2023 में आधिकारिक यात्रा पर और अब जुलाई में तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए।
2018 में ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी-2035 जारी की और भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण भविष्य के आर्थिक साझेदारों में शामिल किया।
2020 में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने ऑस्ट्रेलिया इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी रिपोर्ट जारी कर दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के सुझाव दिए।
2 अप्रैल 2022 को भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आर्थिक सहयोग व व्यापार समझौते (ईसीटीए) पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता 29 दिसंबर 2022 से लागू हुआ। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बड़ी गति मिली।
इसी समय दोहरे कराधान से बचाव से जुड़े प्रावधान भी लागू हुए, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों को राहत मिली।
इस समझौते के तहत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के लगभग 70.3% टैरिफ लाइनों (उत्पाद श्रेणियों) पर रियायती बाजार पहुंच दी। इससे दोनों देशों के कुल व्यापार मूल्य का करीब 90.6% हिस्सा कवर हो गया।
वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सभी उत्पादों (100% टैरिफ लाइनों) को रियायती बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई।
इनमें से 98.3% भारतीय उत्पादों पर समझौता लागू होते ही आयात शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया, जबकि बाकी 1.7% उत्पादों पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से पांच वर्षों में समाप्त किया जा रहा है।
1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में जाने वाले सभी भारतीय उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क लागू हो गया है।
पिछले चार वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग व व्यापार समझौते का असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में साफ दिखाई दिया है। इस समझौते से दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली है और व्यापार में आने वाली कई बाधाएं भी कम हुई हैं। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात दोगुने से भी अधिक बढ़ गया।
वित्त वर्ष 2020-21 में यह करीब चार अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा।
वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में (फरवरी 2026 तक) दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 19.3 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
ईसीटीए के बाद अब दोनों देश व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक 11 दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। यह समझौता लागू होने पर दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश और बाजार तक पहुंच और आसान हो जाएगी। इससे आर्थिक संबंध पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।
दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं।
मार्च 2023 में मुंबई में भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम की पहली बैठक हुई।
जनवरी 2024 में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में ऑस्ट्रेलिया भागीदार देश बना।
अगस्त 2024 में एडिलेड में संयुक्त मंत्रिस्तरीय आयोग की 19वीं बैठक हुई।
फरवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए नया रोडमैप भी जारी किया।
भारत और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार हैं। 2021 में दोनों देशों ने सैन्य रसद सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और मालाबार नौसैनिक अभ्यास में भी साथ हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और मुक्त समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना है।
दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।
2024 में भारत-ऑस्ट्रेलिया नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी शुरू की गई। इसके तहत ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, सौर आपूर्ति शृंखला, ग्रीन स्टील, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और महत्वपूर्ण खनिजों पर मिलकर काम किया जा रहा है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के विस्तार के लिए ऑस्ट्रेलिया के लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
शिक्षा दोनों देशों की साझेदारी का अहम आधार बन चुकी है।
फरवरी 2024 तक लगभग 1.20 लाख भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे थे।
भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
2023 में दोनों देशों ने एक-दूसरे की डिग्रियों को मान्यता देने का समझौता किया।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की कई यूनिवर्सिटी भारत में अपने परिसर खोल रही हैं।
भारतवंशी समुदाय आज ऑस्ट्रेलिया में दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और सामाजिक कड़ी का काम कर रहा है।
यह ऑस्ट्रेलिया का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय है।
2021 की जनगणना के अनुसार, लगभग 9.76 लाख ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने खुद को भारतीय मूल का बताया, जिनमें 6.73 लाख लोग भारत में जन्मे थे। यह ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी का करीब 2.6% है।
वहीं, पंजाबी ऑस्ट्रेलिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा बन चुकी है, जबकि हिंदी देश में घरों में बोली जाने वाली शीर्ष 10 भाषाओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में व्यापार, निवेश, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए), रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, चीन पर निर्भरता कम करने, सुरक्षित आपूर्ति शृंखला विकसित करने और नई तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Source: https://www.amarujala.com/world/beyond-diplomacy-why-pm-modi-s-australia-visit-matters-for-india-australia-trade-2026-07-08