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पहले क्यूआर कोड छापने की अनिवार्यता देश की सिर्फ शीर्ष 300 दवा ब्रांडों पर लागू थी। हालांकि, अब इस संशोधन के बाद क्यूआर कोड छापने की अनिवार्यता का दायरा दवा कंपनियों के साथ कई और दवा ब्रांड्स तक बढ़ेगा।
नए नियम के तहत सभी वैक्सीन (टीके), रोगाणुरोधी (एंटी-वायरल, एंटीबायोटिक्स), कैंसर रोधी दवाओं और एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत आने वाली सभी मादक और नशा पैदा करने वाली दवाओं को इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के दायरे में लाया गया है।
दवाओं पर क्यूआर या बार कोड लगाकर निगरानी करने का यह तंत्र ट्रैक-एंड-ट्रेस प्रणाली पर आधारित होगा, जो दवा के निर्माण (फैक्ट्री) से लेकर मेडिकल स्टोर तक पहुंचने की पूरी यात्रा पर नजर रखता है।
निगरानी को पुख्ता बनाने के लिए दवा निर्माताओं, थोक व्यापारियों, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को इन दवाओं को एक विशेष ट्रैक एंड ट्रेस प्लेटफॉर्म पर दर्ज (लॉग-इन) करना होगा।
इससे उपभोक्ता, फार्मासिस्ट या सप्लाई चेन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति स्मार्टफोन एप का इस्तेमाल कर क्यूआर कोड को स्कैन कर सकता है। स्कैन करते ही दवा का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड स्क्रीन पर आ जाएगा। इससे डिब्बे या दवा की अंदरूनी पैकेजिंग पर छपी जानकारी का मिलान डिजिटल रिकॉर्ड से तुरंत किया जा सकता है।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/qr-code-system-for-medicines-and-vaccines-explained-know-how-monitoring-will-curb-fake-drug-problems-2026-06-30