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फीफा विश्व कप 2026 में केप वर्डे की टीम लगातार सबको हैरान कर रही है। अपने पहले ही विश्व कप मैच में उसने यूरो कप चैंपियन स्पेन को 0-0 से बराबरी पर रोक दिया। इस अनजान सी टीम ने दूसरे मैच में भी कमाल किया। उरुग्वे के खिलाफ हुए दूसरे मुकाबले में केप वर्डे ने 2-2 से ड्रॉ खेला और विश्व कप इतिहास में अपने पहले दो गोल भी किए।
केप वर्डे एक द्वीपीय देश (आर्किपेलागो) है, जिसमें कुल 10 द्वीप हैं। कुल 4,033 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस द्वीपसमूह में नौ द्वीपों पर आबादी रहती है, जबकि एक द्वीप निर्जन है। यह देश अटलांटिक महासागर में अफ्रीकी महाद्वीप के तट से लगभग 445 किलोमीटर दूर स्थित है। पश्चिमी अफ्रीकी देश सेनेगल इसका सबसे नजदीकी पड़ोसी है।
करीब 13.5 करोड़ वर्ष पहले टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल और ज्वालामुखीय विस्फोटों के कारण ये द्वीप समुद्र से बाहर उभरे थे। समय के साथ हवा और बारिश के प्रभाव ने इनके भू-आकृतिक स्वरूप को अलग-अलग रूप दिया। द्वीपसमूह की सबसे ऊंची चोटी फोगो द्वीप पर स्थित पिको डी फोगो है, जिसकी ऊंचाई 2,829 मीटर है। यह एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जिसमें हाल के वर्षों में 1995 और 2014 में विस्फोट हुआ था।
केप वर्डे का इतिहास अपनी भौगोलिक स्थिति की तरह ही अनोखा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब तीन सदी तक यह द्वीपसमूह अटलांटिक महासागर में होने वाले गुलाम व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा। साथ ही यह पुर्तगाल के राजनीतिक कैदियों के निर्वासन का स्थान और स्पेनिश-पुर्तगाली इंक्विजिशन (धार्मिक उत्पीड़न) से बचकर भागे यहूदियों व अन्य लोगों के लिए शरणस्थली भी बना। यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के बीच स्थित होने के कारण यहां अलग-अलग नस्लों और संस्कृतियों का मेल हुआ। इसी मिश्रण से एक नई क्रियोल संस्कृति और भाषा का जन्म हुआ, जो आज केप वर्डे की पहचान है। बाद के वर्षों में क्रियोल समुदाय ने अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खोज और उपनिवेशीकरण की शुरुआत पुर्तगाली नाविकों ने 1456 में इन द्वीपों को खोजा और उस समय इन्हें पूरी तरह निर्जन बताया। पुर्तगाल उस दौर में नए व्यापारिक रास्तों और सोने, मसालों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था। इसी अभियान के दौरान वे केप वर्डे तक पहुंचे। 1461 में सैंटियागो द्वीप पर पहली बस्ती बसाई गई, जो उप-सहारा अफ्रीका में यूरोप का पहला विदेशी उपनिवेश बनी। इसके बाद अन्य द्वीपों पर भी आबादी बसनी शुरू हुई। 1472 में सैंटियागो के निवासियों को गुलाम रखने का अधिकार मिला और धीरे-धीरे केप वर्डे अटलांटिक गुलामी प्रथा का एक प्रमुख केंद्र बन गया। 1466 में पुर्तगाल को सेनेगाम्बिया और गिनी के तट पर लोगों को गुलाम बनाकर रखने का व्यापार का विशेष अधिकार मिलने के बाद रिबेरा ग्रांडे (आज का सिदादे वेल्हा) एक महत्वपूर्ण बंदरगाह बन गया, जहां से ये गतिविधि होती थी। यहां से गुलामों के अलावा गन्ना, रम, कपास और पशुधन का भी व्यापार होता था। सूखा, गरीबी और उपनिवेशी शासन
1494 में स्पेन और पुर्तगाल के बीच हुई टॉर्डेसिलास संधि के तहत दुनिया को प्रभाव क्षेत्रों में बांटा गया और केप वर्डे पुर्तगाल के हिस्से में रहा।
16वीं और 17वीं सदी में डच, फ्रांसीसी और ब्रिटिश समुद्री लुटेरों के हमलों तथा यूरोपीय युद्धों के कारण व्यापार कमजोर पड़ने लगा। 1614 में औपनिवेशिक प्रशासन को रिबेरा ग्रांडे से प्राइया स्थानांतरित करना पड़ा।
18वीं सदी में स्थिति और खराब हो गई। कई वर्षों तक चले भीषण सूखे के कारण 1773 में लगभग आधी आबादी की मौत हो गई। बाद में भी सूखा और अकाल इस देश की बड़ी समस्या बने रहे।
19वीं सदी में हालात धीरे-धीरे सुधरने लगे। 1815 में उत्तरी गोलार्ध में गुलामी प्रथा पर रोक लगी। 1853 में गुलामों के विद्रोह के बाद आखिरकार 1878 में केप वर्डे में गुलामी समाप्त हुई।
हालांकि आर्थिक समस्याएं बनी रहीं। पुर्तगाल ने द्वीपों के विकास में बहुत कम निवेश किया। सीमित प्राकृतिक संसाधन, पानी की कमी और भौगोलिक दूरी के कारण अर्थव्यवस्था कमजोर रही। 1900 के आसपास कॉफी की वैश्विक कीमतें गिरने से यहां की कॉफी खेती भी लगभग खत्म हो गई।
1950 और 1960 के दशक में स्वतंत्रता की मांग तेज होने लगी। 1956 में अमिलकार काब्राल ने गिनी-बिसाऊ में PAIGC (अफ्रीकन पार्टी फॉर द इंडिपेंडेंस ऑफ गिनी एंड केप वर्डे) की स्थापना की। उन्होंने पुर्तगाली शासन के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। 1973 में उनकी हत्या कर दी गई, हालांकि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इसके पीछे कौन था।
आजादी और नया राष्ट्र - 1974 में पुर्तगाल में कार्नेशन क्रांति के बाद तानाशाही शासन का अंत हुआ और स्वतंत्रता का रास्ता खुला। इसके बाद संक्रमणकालीन सरकार बनी और जून 1975 में चुनाव कराए गए।
5 जुलाई 1975 को केप वर्डे ने आधिकारिक रूप से स्वतंत्रता की घोषणा की। अरिस्टिडीस परेरा देश के पहले राष्ट्रपति बने और पेड्रो पीरेस पहले प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए।
आजादी वक्त देश का सरकारी खजाना खाली था, सूखे की समस्या बनी हुई थी और बेरोजगारी करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहायता और विकास कार्यक्रमों की मदद से देश ने धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत की।
आज केप वर्डे को अफ्रीका के अपेक्षाकृत स्थिर, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक देशों में गिना जाता है।
वर्ल्डोमीटर के अनुसार, केप वर्डे की आबादी लगभग पांच लाख 29 हजार है। इस देश की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या के 0.0064% के बराबर है। जनसंख्या के आधार पर देशों की सूची में यह 174वें स्थान पर है।
सदियों से चले आ रहे इस नस्लीय और सांस्कृतिक मिश्रण का प्रभाव आज भी यहां लोगों की शारीरिक बनावट में दिखाई देता है।
केप वर्डे की आधिकारिक भाषा पुर्तगाली है, जिसका इस्तेमाल सरकारी कामकाज, कानून, मीडिया, स्कूलों और चर्चों में किया जाता है।
आम लोगों की बोलचाल की भाषा क्रियोल है। यह अफ्रीकी और यूरोपीय भाषाओं के मेल से बनी दुनिया की सबसे पुरानी क्रियोल भाषाओं में से एक मानी जाती है।
केप वर्डे की क्रियोल भाषा का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पुराने पुर्तगाली शब्दों से बना है, जबकि बाकी शब्द अफ्रीकी, फ्रेंच, अंग्रेजी और अन्य यूरोपीय भाषाओं से लिए गए हैं।
अलग-अलग द्वीपों की अपनी-अपनी बोलियां भी हैं, लेकिन पूरे देश में एक ऐसी क्रियोल भी बोली जाती है जिसे सभी लोग समझते हैं।
देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी कैथोलिक ईसाई है, जबकि बाकि लोग प्रोटेस्टेंट समुदाय से जुड़े हैं। बाकी आबादी विभिन्न छोटे धार्मिक संप्रदायों का पालन करती है।
केप वर्डे द्वीप समूह का निर्माण समुद्र से ऊपर उठते हुए मैग्मा के कारण हुआ था, यही वजह है कि वे कभी भी अफ्रीकी महाद्वीप का हिस्सा नहीं रहे।
इस देश का आधिकारिक पुर्तगाली नाम काबो वर्डे है। फ्रांसिस्को कार्वाल्हो केप वर्डे के प्रधानमंत्री हैं। वहीं, यहां के राष्ट्रपति जोस मारिया नेवेस हैं। केप वर्डे में 1991 में पहली बार बहुदलीय चुनाव कराए गए। इससे पहले लगभग डेढ़ दशक तक देश में अफ्रीकन पार्टी फॉर द इंडिपेंडेंस ऑफ केप वर्डे (PAICV) का एकदलीय शासन था। यह मध्यम आय वाले देश के रूप में देखा जाता है।
यहां नागरिकता मुख्य रूप से दो तरह से मिल सकती है, जन्म के आधार पर और विशेष परिस्थितियों में आवेदन के आधार पर। 1. जन्म से नागरिकता किसी व्यक्ति को जन्म से केप वर्डे का नागरिक माना जाता है यदि:
उसका जन्म केप वर्डे में हुआ हो और उसके माता या पिता में से कोई एक केप वर्डे का नागरिक हो।
उसका जन्म केप वर्डे में हुआ हो और उसके पास किसी अन्य देश की नागरिकता न हो।
उसके माता-पिता अज्ञात हों या वे शरणार्थी व विस्थापित हों और केप वर्डे में रह रहे हों।
2. वंश के आधार पर नागरिकता विदेश में जन्मे ऐसे लोग भी केप वर्डे की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं जिनके माता-पिता, दादा या दादी जन्म से केप वर्डे के नागरिक रहे हों। इसके अलावा, केप वर्डे में जन्मे विदेशी माता-पिता के बच्चे भी नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते उनके माता-पिता कम से कम पांच वर्षों से देश में रह रहे हों। 3. दोहरी नागरिकता की अनुमति केप वर्डे की एक खास बात यह है कि यहां दोहरी नागरिकता की अनुमति है। यानी कोई केप वर्डे का नागरिक किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त कर ले, तब भी वह अपनी मूल केप वर्डे की नागरिकता नहीं खोता। सरकार अन्य देशों के साथ दोहरी नागरिकता संबंधी समझौते भी कर सकती है। 4. विवाह के जरिए नागरिकता अगर कोई विदेशी व्यक्ति केप वर्डे के नागरिक से विवाह करता है, तो वह नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है। अगर बाद में शादी टूट भी हो जाए, तब भी अच्छी नीयत से प्राप्त की गई नागरिकता बरकरार रह सकती है। 5. गोद लेने पर नागरिकता केप वर्डे का नागरिक अगर किसी विदेशी या अनाथ बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेता है, तो उस बच्चे को भी नागरिकता मिल सकती है। 6. प्राकृतिककरण के जरिए नागरिकता विदेशी नागरिक भी कुछ शर्तों के साथ केप वर्डे की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
इसके लिए कम से कम पांच वर्षों तक केप वर्डे में रहना जरूरी है।
वह अपने जीवन-यापन का खर्च स्वयं उठा सकता हो।
Source: https://www.amarujala.com/world/where-is-cape-verde-the-island-nation-stunning-football-giants-fifa-world-cup-2026-2026-06-23