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इस कानून के तहत असामाजिक गतिविधियों में शामिल या भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका वाले व्यक्तियों को बिना ट्रायल (सुनवाई) के अधिकतम 12 महीने (एक वर्ष) तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है।
हिरासत का आदेश राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), पुलिस आयुक्त या सरकार की तरफ से अधिकृत पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के पुलिस अधिकारी की ओर से जारी किया जा सकता है।
जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त की तरफ से जारी किए गए हिरासत का आदेश शुरुआत में केवल 15 दिनों के लिए वैध रहता है और इसे आगे जारी रखने के लिए राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी लेनी जरूरी होगा।
हिरासत के आदेशों की समीक्षा के लिए सलाहकार बोर्ड के गठन का प्रावधान है। इस बोर्ड के अध्यक्ष हाईकोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश होंगे और इसमें दो अन्य सदस्य होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखते हों।
हर हिरासत आदेश को इस बोर्ड के सामने रखा जाएगा। अगर बोर्ड यह निष्कर्ष निकालता है कि हिरासत के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं, तभी राज्य सरकार हिरासत को 12 महीने तक बढ़ा सकती है।
इस कानून का एक कड़ा प्रावधान यह है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को आमतौर पर सलाहकार बोर्ड के सामने किसी वकील के जरिए पक्ष रखने की इजाजत नहीं दी गई है। बोर्ड सिर्फ विशेष मामलों में ही लिखित कारण देकर ही आरोपी को वकील की अनुमति दे सकता है।
बोर्ड में किसी भी मामले की कार्यवाही को पूरी तरह गोपनीय रखने का प्रावधान भी किया गया है। यानी किसी मामले की सुनवाई, तर्कों के दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।
यह कानून पुलिस और प्रशासन को तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी के अधिकार देता है।
हिरासत में लिए गए या तड़ीपार किए गए व्यक्ति को पनाह देने वालों के लिए सजा का प्रावधान है।
अधिकारियों की निष्पक्ष और साफगोई से की गई कार्रवाइयों के लिए उन्हें कानूनी छूट दी गई है।
संगठित अपराधों और छोटे संगठित अपराध के मामले में।
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस)।
नुकसान का आकलन करने और मुआवजा तय करने के लिए एक दावा आयोग बनाया जाएगा।
इस आयोग का प्रमुख एक नौकरशाह होगा, जो कम से कम अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) रैंक का अधिकारी होगा।
आयोग को दीवानी अदालत यानी सिविल कोर्ट के बराबर के अधिकार प्राप्त होंगे।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/west-bengal-new-anti-crime-laws-come-into-force-public-safety-and-control-of-anti-social-activities-explained-2026-07-13