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स्वच्छ ऊर्जा अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। ई-20 ईंधन, और हाइड्रोजन ट्रेन जैसी पहलों के बीच देश बिजली उत्पादन में भी सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहा है। भारत ने वर्ष 2030 और 2070 के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं।

सौर ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो हमें सूरज की रोशनी से मिलती है। जब सोलर पैनलों पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं, तो उनमें लगे फोटोवोल्टिक सेल सूर्य के प्रकाश को सीधे बिजली में बदल देते हैं। इस बिजली का उपयोग घरों, दफ्तरों, फैक्ट्रियों, खेतों और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, प्रदूषण घटता है और पर्यावरण को नुकसान भी कम पहुंचता है।

पिछले एक दशक में सौर ऊर्जा के तेज विस्तार ने भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता को लगभग दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज सौर ऊर्जा पवन, जलविद्युत और बायोमास को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत बन चुकी है। इससे भारत कम-कार्बन ऊर्जा व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

वर्तमान में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावाट से अधिक है।

अक्तूबर 2025 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित क्षमता 259 गीगावाट से अधिक हो चुकी थी, जो कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है।

31 जनवरी 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 1,40,602 मेगावाट पहुंच चुकी थी, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत थी।

वित्त वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक भारत ने 34,955.24 मेगावाट नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो इस अवधि में किसी भी अन्य ऊर्जा स्रोत की तुलना में सबसे अधिक रही।

31 जनवरी 2026 तक पवन, सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की कुल स्थापित क्षमता 2,12,025 मेगावाट थी, जिसमें अकेले सौर ऊर्जा का योगदान 1,40,602 मेगावाट था।

भारत ने नवंबर 2021 में ग्लासगो में आयोजित कॉप-26 सम्मेलन के दौरान 'पंचामृत' लक्ष्य घोषित किए। यही लक्ष्य भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति का रोडमैप माने जाते हैं। इन लक्ष्यों के तहत;

2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित बिजली क्षमता विकसित करना।

2030 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करना।

2030 तक अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी लाना।

2005 के मुकाबले अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी करना।

2070 तक शुद्ध शून्य (नेट-जीरो) उत्सर्जन हासिल करना।

कुल स्थापित बिजली क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी का लक्ष्य भारत लगभग पांच वर्ष पहले ही हासिल कर चुका है। हालांकि 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता का लक्ष्य अभी पूरा किया जाना बाकी है।

सरकार के अनुसार, 2014 में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 3 गीगावाट थी। अक्तूबर 2025 तक यह बढ़कर 129.92 गीगावाट हो गई, यानी लगभग 40 गुना से अधिक वृद्धि हुई। सौर ऊर्जा क्षमता का स्वरूप इस प्रकार है;

जमीन पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र : 98.72 गीगावाट

ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सौर संयंत्र : 22.42 गीगावाट

हाइब्रिड सौर परियोजनाएं : 3.32 गीगावाट

ऑफ-ग्रिड सौर प्रणाली : 5.45 गीगावाट

1. राष्ट्रीय सौर मिशन जनवरी 2010 में शुरू किया गया राष्ट्रीय सौर मिशन भारत की प्रमुख सौर ऊर्जा नीति है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करना है। इसी मिशन के तहत जमीन पर स्थापित सौर संयंत्रों, रूफटॉप सौर, हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं का विस्तार किया गया। यह मिशन 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है। 2. प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना 13 फरवरी 2024 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सौर प्रणाली लगाना और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। योजना का कुल बजट 75,021 करोड़ रुपये है। यह योजना घरों में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के साथ बिजली बिल कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने पर भी केंद्रित है।

दिसंबर 2025 तक 23.9 लाख घरों में रूफटॉप सौर प्रणाली लगाई जा चुकी थी।

लगभग 7 गीगावाट क्षमता जुड़ चुकी थी।

13,464.6 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की जा चुकी थी।

3. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना सरकार ने घरेलू स्तर पर उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल के निर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 24,000 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना शुरू की। यह योजना देश में मजबूत सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर केंद्रित है।

इसके तहत 48,337 मेगावाट विनिर्माण क्षमता को स्वीकृति मिली।

सितंबर 2025 तक 52,900 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ।

4. प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य किसानों को केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक बनाना है। इसके तहत किसान अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय भी अर्जित कर सकते हैं। योजना के तीन प्रमुख घटक हैं;

बंजर या परती भूमि पर छोटे सौर संयंत्र स्थापित करना।

ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण करना।

अक्तूबर 2025 तक नौ लाख से अधिक स्टैंडअलोन सौर पंप लगाए जा चुके थे।

10,535 ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण किया जा चुका था।

9,74,458 फीडर स्तर के सौरकरण का कार्य पूरा हो चुका था।

योजना को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया।

दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में 15 हॉर्सपावर तक के सौर पंपों पर 30 से 50 प्रतिशत तक केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जा रही है।

5. सौर पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना योजना दिसंबर 2014 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर सौर पार्क विकसित करना है, ताकि भूमि, सड़क, बिजली निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकें।

31 अक्तूबर 2025 तक 13 राज्यों में 55 सौर पार्क स्वीकृत किए गए।

कुल स्वीकृत क्षमता 39,973 मेगावाट रही।

इनमें से 14,922 मेगावाट क्षमता स्थापित हो चुकी थी।

योजना को 31 मार्च 2029 तक बढ़ा दिया गया।

भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान सबसे आगे है। राज्य में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 22,860.73 मेगावाट है। यहां साल में 325 से अधिक दिन तेज धूप रहती है, इसलिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए यह सबसे उपयुक्त राज्यों में गिना जाता है। राजस्थान के साथ-साथ गुजरात और मध्य प्रदेश भी देश के प्रमुख सोलर हब बन चुके हैं। इन राज्यों में दुनिया की सबसे बड़ी सौर परियोजनाओं में शामिल कई सोलर पार्क स्थापित किए गए हैं। इनमें राजस्थान का भड़ला सोलर पार्क खास है, जिसकी क्षमता 2.2 गीगावाट (GW) है। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पार्क है और भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

भारतीय सौर ऊर्जा निगम की प्रतिस्पर्धी नीलामियों के कारण कई परियोजनाओं में सौर बिजली की दर 2.50 रुपये प्रति यूनिट से भी कम पहुंच गई है। कई मामलों में यह कोयले से बनने वाली बिजली से भी सस्ती साबित हुई है।

भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का संस्थापक सदस्य है और इसका मुख्यालय गुरुग्राम में स्थित है। अक्तूबर 2025 में नई दिल्ली में इसकी आठवीं महासभा आयोजित हुई, जिसमें 125 से अधिक देशों के 550 से ज्यादा प्रतिनिधियों और 30 से अधिक मंत्रियों ने भाग लिया। इस दौरान सौर ऊर्जा वित्त, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी सहयोग और सभी देशों तक सस्ती स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने पर सहमति बनी। बैठक में 'एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड' पहल को भी आगे बढ़ाया गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बिजली ग्रिड को जोड़कर सौर ऊर्जा का वैश्विक स्तर पर बेहतर उपयोग करना है। इसके साथ ही रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास, महिलाओं की भागीदारी और डिजिटल समावेशन को भी सौर क्रांति का हिस्सा बनाया गया।

अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के वर्ष 2025 के अनुसार;

सौर ऊर्जा क्षमता में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी चौथे स्थान पर है।

ऊर्जा क्षेत्र की रिसर्च संस्था एम्बर की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चीन दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश रहा। चीन ने वर्ष 2025 में 1,175 टेरावॉट-घंटे (TWh) सौर बिजली का उत्पादन किया। इसके बाद अमेरिका, भारत, जापान और जर्मनी का स्थान रहा। ये पांचों देश मिलकर दुनिया की करीब 70% सौर बिजली का उत्पादन करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया में सौर बिजली का उत्पादन बढ़कर 2,778 टेरावॉट-घंटे के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 2024 की तुलना में 30% अधिक है। यह अब तक का सबसे अधिक उत्पादन है और पिछले आठ वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी भी है। एम्बर का कहना है कि दुनिया में बनी कुल सौर बिजली यूरोपीय संघ की पूरे साल की बिजली की जरूरत के बराबर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2019 से 2024 के बीच दुनिया में जितनी नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, उसमें 68% हिस्सा अकेले सौर ऊर्जा का रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह सोलर पैनलों की कीमतों में भारी गिरावट है। 2015 से 2024 के बीच सोलर पैनलों की कीमतें करीब 90% तक घट गईं, जिससे सौर ऊर्जा पहले की तुलना में काफी सस्ती और अधिक सुलभ हो गई।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/the-sun-is-becoming-india-s-biggest-power-source-how-solar-energy-is-expanding-where-india-stands-globally-2026-07-18