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15 जून 2001 साल 1999 में 'मन' और 2000 में 'मेला' जैसी फ्लॉप फिल्में दे चुके आमिर खान की अगली फिल्म 'लगान' इसी तारीख पर रिलीज हुई थी। साढ़े 3 घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म जिसमें आमिर को छोड़कर कोई और बड़ा जाना पहचाना चेहरा नहीं था। एक्शन फिल्मों के उस दौर में दूसरी तरफ रिलीज हुई थी सनी देओल की फिल्म 'गदर'। कुल मिलाकर 'लगान' के लिए दर्शकों को थिएटर तक खींच पाना आसान नहीं था। पर फिल्म की रिलीज के दिन अंदाजा लगा कि भुवन अपनी टोली के साथ इतिहास रचने निकले हैं। उस दौर में शायद किसी ने नहीं सोचा था कि 'लगान' सिर्फ एक फिल्म बनकर नहीं रह जाएगी, इसे 25 साल बाद भी बड़ी शिद्दत से याद किया जाएगा। फिल्म में भले ही आमिर खान भुवन बनकर अपनी लड़ाई लड़ रहे थे पर उनकी टोली में एक ऐसा किरदार भी था जिसने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उस किरदार का नाम था गोली। इस किरदार को बड़े पर्दे पर अभिनेता दयाशंकर पांडे ने निभाया था। आज 'लगान' को रिलीज हुए पूरे 25 साल पूरे होने पर अमर उजाला से बातचीत में पांडे ने उस दौर की कई यादें साझा की हैं। ऐसी यादें, जिन्हें सुनकर महसूस होता है कि कुछ फिल्में सिर्फ बनती नहीं हैं, वो जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं।

छह महीने घर से दूर थे 'इस फिल्म का पूरा शूटिंग शेड्यूल ही हम सबके लिए यादगार बन गया। हम 2 जनवरी 2000 को मुंबई से निकले थे और 19 जून को वापस लौटे थे। हमने फिल्म के लगातार छह महीने शूट किया। अपने परिवार को छोड़कर इतना लंबा शेड्यूल मैंने पहले कभी नहीं किया था। फिल्म इंडस्ट्री में इतना लंबा लगातार शेड्यूल, मुझे नहीं लगता ऐसा कभी इससे पहले हुआ था। आज वीडियो कॉल है, मोबाइल है। परिवार का चेहरा कभी भी देख सकते हैं। लेकिन उस वक्त ऐसा कुछ नहीं था। कभी-कभी फोन करते थे घर पर तो बस बीवी और बच्चों की आवाज सुनकर ही खुश हो जाते थे।'

आमिर ने हम सबको बड़े प्यार से रखा ‘आमिर साहब ने हम सबको बहुत अच्छे से रखा था। उन्होंने कहा था कि परिवार को बुला सकते हो, लेकिन छह महीने तक कौन किसी को रख सकता है। कुछ दिन के लिए लोग आते थे। मिलते थे और वापस चले जाते थे। आज सोचता हूं तो लगता है कि हमने सच में एक बिल्कुल अलग दौर जिया था। सोचिए साल 2000 में जब हम लगान की शूटिंग कर रहे थे, उसी दौरान मेरा बेटा पैदा हुआ था। आज वही बेटा 25 साल का हो चुका है और शादीशुदा है। कभी-कभी यकीन ही नहीं होता कि वक्त इतनी तेजी से निकल गया। ऐसा लगता था कि फिल्म की शूटिंग खत्म ही न हो। क्योंकि शूटिंग के दौरान जो खुशियां हमने जी थीं, जो मजा हमने लिया था… हम उसे खत्म नहीं होने देना चाहते थे। अक्सर लोग फिल्म खत्म होने का इंतजार करते हैं। लेकिन ‘लगान’ के साथ उल्टा था। ऐसा लगता था कि ये सफर चलता रहे।’

रोक–रोककर फिल्म देखता हूं 'इतने साल में मैंने कई बार यह फिल्म अकेले बैठकर भी देखी है। मैं उसे रोक-रोक कर देखता था क्योंकि हर सीन के पीछे एक याद जुड़ी हुई थी।कोई सीन खत्म होता था तो याद आता था कि इसकी शूटिंग के बाद क्या हुआ था। उस दिन सेट पर क्या माहौल था। शायद यही वजह है कि मेरे लिए लगान सिर्फ फिल्म नहीं, जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। '

फिल्म ‘लगान’ 100 हफ्ते चलती 'उस दौर में आटीटी और टीवी का आज जैसा माध्यम नहीं था। थिएटर ही सब कुछ होता था। मुझे पूरा विश्वास है कि अगर आज वाला ओटीटी का दौर नहीं आया होता, तो ‘लगान’ जैसी फिल्म सौ हफ्ते चलती। सिनेमा देखने का तरीका अलग था। लेकिन खुशी की बात ये है कि इस फिल्म को लोग आज भी उतना ही प्यार करते हैं। हमें अभी पता चला कि फिल्म तीन दिन के लिए दोबारा रिलीज हो रही है। खबर आई कि लगभग 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही हो चुकी है। ये हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। इसे मैं अहंकार नहीं कहूंगा। हम खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि ऐसी फिल्म का हिस्सा बने।'

Source: https://www.amarujala.com/photo-gallery/entertainment/celebs-interviews/25-years-of-lagaan-daya-shankar-pandey-exclusive-interview-talk-about-aamir-khan-iconic-movie-2026-06-14