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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक गाड़ियां (ईवी) लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। शायद आपने भी ईवी खरीद ली होगी या खरीदने का प्लान बना रहे होंगे। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ईवी के लिए सिर्फ बेसिक इंश्योरेंस लेना काफी नहीं है।

किसी भी ईवी की कुल कीमत का लगभग 60% हिस्सा सिर्फ उसकी बैटरी का होता है। कार कंपनियों की वारंटी की शर्तें अक्सर बहुत पेचीदा होती हैं।

कार कंपनियां अक्सर एक साल का रोड साइड असिस्टेंस तो देती हैं, लेकिन शहर के बाहर या दूर-दराज के इलाकों में यह ज्यादा काम नहीं आता। क्यों है जरूरी: पेट्रोल-डीजल कारों की तरह ईवी को खराब होने पर धक्का देना या रस्सी से बांधकर खींचना मोटर को बर्बाद कर सकता है। ईवी को सुरक्षित सर्विस सेंटर तक ले जाने के लिए फ्लैटबेड टोइंग वैन की जरूरत होती है। इसलिए अपनी पॉलिसी में RSA एड-ऑन जरूर शामिल कराएं।

जिस तरह पेट्रोल कारों में इंजन प्रोटेक्शन कवर होता है, वैसे ही ईवी के लिए मोटर प्रोटेक्शन होता है। ईवी में इंजन की जगह मोटर, कंट्रोलर और कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं। क्यों है जरूरी: जलभराव, बाढ़ या ज्यादा बारिश के पानी की वजह से अगर मोटर खराब हो जाती है, तो साधारण इंश्योरेंस इसमें आपकी कोई मदद नहीं करेगा। इसके भारी-भरकम बिल से बचने के लिए यह एड-ऑन लेना बहुत समझदारी है।

इलेक्ट्रिक गाड़ी की जान उसके चार्जर में बसती है। वैसे तो गाड़ी खरीदते समय बेसिक चार्जर साथ आता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक आइटम होने के कारण इसके खराब होने के चांस रहते हैं। क्यों है जरूरी: अगर चार्जर चोरी हो जाए या किसी वजह से खराब हो जाए, तो नया चार्जर खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। यह एड-ऑन आपके चार्जर को भी सुरक्षा की गारंटी देता है।

पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स काफी महंगे होते हैं। क्यों है जरूरी: साधारण (कॉम्प्रिहेंसिव) इंश्योरेंस होने पर एक्सीडेंट के समय प्लास्टिक या फाइबर पार्ट्स की कटी हुई कीमत का पैसा आपको अपनी जेब से भरना पड़ता है। जीरो डेप कवर (जिसे बंपर-टू-बंपर भी कहते हैं) लेने से एक्सीडेंट के क्लेम के दौरान आपको अपनी जेब से ना के बराबर पैसे देने पड़ते हैं और आपको पूरा सुकून मिलता है।

Source: https://www.amarujala.com/automobiles/ev-owners-beware-basic-insurance-may-not-be-enough-2026-06-12