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आग से घिरी इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल पर खड़े लोगों की आंखों में खौफ साफ दिखाई दे रहा था। नीचे झांकते चेहरे मानो जिंदगी और मौत के बीच आखिरी उम्मीद तलाश रहे हों। लेकिन जैसे-जैसे धुआं कमरों में भरता गया, बचने की संभावनाएं कम होती चली गईं। आखिरकार कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगाने का फैसला किया। बुधवार को मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड का यह दृश्य देखने वालों को झकझोर गया। स्थानीय युवाओं ने जान पर खेलकर कई लोगों की जान बचाई।

बच्चे को सीने से लगाकर मां ने लगाई छलांग हादसे के दौरान एक महिला ने अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिला बच्चे को कसकर पकड़े हुए थी और बाहर निकलने का कोई रास्ता न बचने पर उसने यह जोखिम भरा कदम उठाया। स्थानीय लोगों ने पहले ही इमारत के नीचे गद्दे बिछा दिए थे। महिला और बच्चा दोनों गद्दे पर गिरे और सुरक्षित बच गए। हालांकि महिला को चोटें आने की आशंका जताई गई। बाद में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

जिंदगी और जमीन के बीच कुछ सेकंड का फासला स्थानीय युवक वकार ने बताया कि खिड़कियों पर खड़े लोग पहले नीचे देखते, फिर पीछे उठती आग की लपटों को और आखिर में खुद को हवा के हवाले कर देते। कई लोग छलांग लगाने से पहले रो रहे थे। नीचे खड़े लोगों की सांसें भी थम जाती थीं। जैसे ही कोई ऊपर से कूदता, पूरे इलाके में सन्नाटा छा जाता। फिर लोग दौड़कर घायल को संभालने लगते। उस समय जमीन पर सिर्फ शरीर नहीं गिर रहे थे, बल्कि लोगों की उम्मीदें और हौसले भी टूटते नजर आ रहे थे।

मुंह पर कपड़ा बांधा और घुंस गए होटल में स्थानीय युवा मोहम्मद अफजल उन युवाओं में शामिल थे जो होटल के भीतर घुसे। उन्होंने बताया कि जैसे ही हम सभी अंदर पहुंचे तो धुएं की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया। आंखों में जलन होने लगी। सीढ़ियां गर्म हो चुकी थीं। कई लोग कमरों के बाहर बेहोश पड़े मिले। अफजल के अनुसार, स्थानीय युवाओं ने अपने मुंह पर कपड़ा बांधा और एक-एक मंजिल पर जाकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने कई लोगों को कंधों पर उठाकर नीचे पहुंचाया। कुछ लोग घबराहट में रो रहे थे, कुछ बेहोश थे।

इस घटना के तुरंत बाद उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की गई है। प्रशासन ने न केवल हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि बृहस्पतिवार यानी 4 जून से पूरी दिल्ली में एक महीने का सघन प्रवर्तन अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि 4 जून से शुरू होने वाला यह अभियान दिल्ली के सभी होटलों, लॉज, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों और रेस्टोरेंट्स में फायर सेफ्टी मानकों की जांच करेगा। दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस पूरे अभियान के लिए नोडल विभाग घोषित किया गया है, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। इस अभियान की निगरानी संयुक्त रूप से मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर करेंगे।

होटलों और अवैध निर्माणों पर गिरेगी गाज प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी होटल, लॉज या गेस्ट हाउस में स्वीकृत संख्या से अधिक कमरे पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत बंद कर दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस, एमसीडी और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से होटल एसोसिएशनों के साथ बैठकें करेंगे और उन्हें लाइसेंस की शर्तों और फायर सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन करने की अंतिम चेतावनी देंगे। जो संस्थान मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें न केवल सील किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

15 दिन का अल्टीमेटम और डिजिटल ऑडिट इस मीटिंग में तय हुआ है कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपने फायर सेफ्टी उपकरण, पानी के टैंक और सप्लाई सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। खास बात यह है कि फायर सेफ्टी नियमों को डिजिटल रूप में सभी व्यावसायिक इमारतों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को भेजा जाएगा, ताकि वे खुद अपनी तैयारी की जांच कर सकें। 4 जून से ही अधिकारियों द्वारा कंकरेंट ऑडिट की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।

जनता की भागीदारी के लिए समर्पित हेल्पलाइन और ईमेल भ्रष्टाचार और लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने जनता को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया है। फायर विभाग एक सप्ताह के भीतर एक समर्पित हेल्पलाइन और ईमेल आईडी जारी करेगा। इसके माध्यम से नागरिक अपने आसपास के उन भवनों की शिकायत कर सकेंगे जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। इन फीडबैक के आधार पर उल्लंघनकर्ताओं की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दमकल की राह में बाधा बनने वाले चोकपॉइंट्स हटेंगे अक्सर देखा गया है कि संकरी गलियों या अतिक्रमण के कारण फायर टेंडर्स मौके पर नहीं पहुंच पाते। इसके समाधान के लिए दिल्ली पुलिस, एमसीडी और लैंड ओनिंग एजेंसियां एक एक्सेसिबिलिटी सर्वे करेंगी। इस सर्वे का मकसद उन बाधाओं (बॉटलनेक) को पहचानना है जो दमकल की गाड़ियों का रास्ता रोकती हैं। जहां संभव होगा वहां से अतिक्रमण हटाया जाएगा और जहां रास्ता चौड़ा करना मुमकिन नहीं होगा, वहां वैकल्पिक अग्निशमन व्यवस्था की जाएगी।

मालवीय नगर हादसे के पीड़ितों के लिए कड़े निर्देश बैठक में वर्तमान हादसे के पीड़ितों के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मृतकों की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग और प्राथमिकता के आधार पर शिनाख्त की जाएगी। दूतावासों और परिजनों को सूचित कर शवों के अंतिम संस्कार या परिवहन में पूरी मदद दी जाएगी।

Source: https://www.amarujala.com/delhi-ncr/video-of-malviya-nagar-fire-incident-surfaces-people-seen-jumping-from-windows-2026-06-03