खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कभी 'ऑफिस ऑफिस' देखकर बड़ी हुईं श्रुति शर्मा आज उसी चर्चित फ्रेंचाइजी का हिस्सा हैं। अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में उन्होंने अपने नए शो 'ऑफिस ऑफिस- चली मुसद्दीलाल की बेटी', पंकज कपूर से मिलने की इच्छा, अपने किरदार अनोखी और सरकारी सिस्टम से जुड़े निजी अनुभवों पर खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत में क्या कुछ रहा खास।
एक दिन पंकज कपूर से मिलना जरूर चाहूंगी शो में मुसद्दीलाल की बेटी का किरदार निभा रहीं श्रुति शर्मा की एक ख्वाहिश अब भी अधूरी है। स्क्रीन पर जिस किरदार की विरासत को वह आगे बढ़ा रही हैं, उसके पीछे के कलाकार पंकज कपूर से उनकी अब तक मुलाकात नहीं हुई है।
पंकज कपूर से मिलने की इच्छा जाहिर करते हुए श्रुति शर्मा ने कहा, 'अभी तक पंकज कपूर सर से मुलाकात नहीं हुई है। मैं उनके काम की बहुत बड़ी फैन हूं। दिल से चाहूंगी कि एक दिन उनसे मिलूं। मैं चाहती हूं कि वह यह शो देखें और मुझे बताएं कि उन्हें मेरा काम कैसा लगा। अगर वह मुझे कोई सलाह दें या अपना रिव्यू शेयर करें, तो वह मेरे लिए बहुत खास होगा। उम्मीद है कि कभी न कभी मुलाकात होगी। और अगर उन्हें मेरा काम पसंद आया, तो शायद उससे बड़ी तारीफ मेरे लिए कोई नहीं होगी।'
बचपन में ‘ऑफिस ऑफिस’ देखती थी, आज उसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा हूं ‘ऑफिस ऑफिस’ से श्रुति का रिश्ता नया नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले वह इसे टीवी पर देखती थीं और अब उसी कहानी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी, तब ‘ऑफिस ऑफिस’ बहुत देखा करती थी। शो की यादें आज भी मेरे जहन में ताजा हैं। इसलिए कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मुझे इसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा। मैं खुद को बहुत ग्रेटफुल मानती हूं।मैं चाहती हूं कि आज के बच्चे और युवा भी इस शो को उसी तरह याद रखें, जैसे हम पुराने ‘ऑफिस ऑफिस’ को याद रखते हैं। अगर हमारा काम लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सके और वे इस शो से जुड़ाव महसूस करें, तो इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए कुछ नहीं होगी।'
मुसद्दीलाल हार जाते थे, लेकिन अनोखी हार नहीं मानती पुराने और नए ऑफिस ऑफिस के बीच सबसे बड़ा फर्क क्या है? इस सवाल पर श्रुति ने कहा, 'पुराने ऑफिस ऑफिस में हमने देखा कि मुसद्दीलाल हमेशा हालातों और करप्शन से लड़ते-लड़ते आखिर में हारकर वापस आ जाते थे। लेकिन इस बार हमारे शो में एक नया ट्विस्ट है। अनोखी उनकी बेटी जरूर है, लेकिन वह हारती नहीं है। ऑफिस वाले भले उसे कितने भी चक्कर कटवाएं या परेशान करें, लेकिन वह उन्हें सबक सिखाकर और जीत हासिल करके ही लौटती है। हर एपिसोड में ऑडियंस को उसका यही अंदाज देखने को मिलेगा। जिन्होंने अब तक ऑफिस ऑफिस में मुसद्दीलाल को हैरान-परेशान देखा है, वे अब अनोखी को सिस्टम से लड़ते और जीतते हुए देखेंगे।'
'आधार कार्ड के लिए लगाने पड़े थे कई चक्कर' शो में सरकारी सिस्टम से भिड़ने वाली अनोखी की तरह श्रुति के पास भी एक ऐसा अनुभव है, जिसने उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं की मुश्किलों का एहसास कराया। उन्होंने कहा, 'सरकारी कामों में तो ऐसा अनुभव लगभग हर किसी के साथ होता है। मुझे याद है कि एक बार मैंने अपने आधार कार्ड पर एड्रेस बदलवाने की कोशिश की थी। उस दौरान मुझे काफी परेशानी हुई। अपॉइंटमेंट ही नहीं मिल रहा था और मेरे भाई ने कई सरकारी ऑफिसों के चक्कर लगाए थे। एक वक्त पर हम काफी परेशान हो गए थे। मुझे लगता है कि ऐसे अनुभव बहुत कुछ सिखा जाते हैं। चाहे सरकारी संस्थान हो या प्राइवेट कॉरपोरेशन, कई बार प्रक्रियाएं उम्मीद से ज्यादा समय लेती हैं और काम पूरा होने में भी काफी वक्त लग जाता है।'
Source: https://www.amarujala.com/entertainment/shruti-sharma-exclusive-interview-about-her-new-show-office-office-and-more-about-her-career-2026-06-09